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क्‍यों बच्चे जल्‍द कोरोना को दे देते हैं शिकस्‍त, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, आप भी जानें

न्यूयॉर्क। एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चों में नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ एंटीबॉडी पहले से ही मौजूद होता है। इसलिए वे आसानी से वायरस से संक्रमित नहीं होते हैं। यदि कुछ बच्चे इसकी चपेट में आ भी जाते हैं तो उनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई देते या फिर वे जल्दी ठीक हो जाते हैं। जर्नल पीडियाट्रिक में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि युवा मरीजों में वायरस और एंटीबॉडी एक साथ मिल सकता है।

अमेरिका में चिल्ड्रेन्स नेशनल हॉस्पिटल से इस अध्ययन के मुख्य लेखक बुराक बहार ने कहा, ‘हालांकि अधिकांश वायरस के साथ जब आप एंटीबॉडी का पता लगाना शुरू करते हैं तो वायरस का पता नहीं लग पाता। लेकिन कोविड-19 की जांच पर दोनों का एक साथ पता लग सकता है।’ उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि बच्चों में अभी भी वायरस को प्रसारित करने की क्षमता है, भले ही एंटीबॉडी का पता चल गया हो

इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 6, 360 बच्चों में सार्स-सीओवी-2 का परीक्षण किया और 215 मरीजों में एंटीबॉडी की भी जांच की गई। इसमें से 33 मरीजों ने कोरोना और एंटीबॉडी दोनों परीक्षण करवाया था। 33 में से नौ मरीजों में एंटीबॉडी भी पाया गया और बाद में इनका कोरोना टेस्ट भी पॉजिटिव आया। बता दें कि सार्स-सीओवी-2 नामक विषाणु के कारण कोरोना का वायरस पनपता है।

अध्ययन में वायरल क्लीयरेंस और इम्यूनोलॉजिकल रिस्पॉस के समय का भी आकलन किया गया। इस दौरान पता चला कि संक्रमण होने के बाद पूरी तरह ठीक होने में मरीजों को लगभग 25 दिन का समय लग सकता है। लेकिन छह से 15 साल के बच्चों में वायरस का असर 32 दिनों तक भी देखा गया। इस आयु वर्ग की लड़कियों में 44 दिनों तक वायरस का प्रभाव देखा गया। हालाकि शुरुआती कुछ दिनों के बाद ही वायरस के फैलने की क्षमता कम हो जाती है।

न्यूयॉर्क। एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चों में नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ एंटीबॉडी पहले से ही मौजूद होता है। इसलिए वे आसानी से वायरस से संक्रमित नहीं होते हैं। यदि कुछ बच्चे इसकी चपेट में आ भी जाते हैं तो उनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई देते या फिर वे जल्दी ठीक हो जाते हैं। जर्नल पीडियाट्रिक में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि युवा मरीजों में वायरस और एंटीबॉडी एक साथ मिल सकता है।

अमेरिका में चिल्ड्रेन्स नेशनल हॉस्पिटल से इस अध्ययन के मुख्य लेखक बुराक बहार ने कहा, ‘हालांकि अधिकांश वायरस के साथ जब आप एंटीबॉडी का पता लगाना शुरू करते हैं तो वायरस का पता नहीं लग पाता। लेकिन कोविड-19 की जांच पर दोनों का एक साथ पता लग सकता है।’ उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि बच्चों में अभी भी वायरस को प्रसारित करने की क्षमता है, भले ही एंटीबॉडी का पता चल गया हो

इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 6, 360 बच्चों में सार्स-सीओवी-2 का परीक्षण किया और 215 मरीजों में एंटीबॉडी की भी जांच की गई। इसमें से 33 मरीजों ने कोरोना और एंटीबॉडी दोनों परीक्षण करवाया था। 33 में से नौ मरीजों में एंटीबॉडी भी पाया गया और बाद में इनका कोरोना टेस्ट भी पॉजिटिव आया। बता दें कि सार्स-सीओवी-2 नामक विषाणु के कारण कोरोना का वायरस पनपता है।

अध्ययन में वायरल क्लीयरेंस और इम्यूनोलॉजिकल रिस्पॉस के समय का भी आकलन किया गया। इस दौरान पता चला कि संक्रमण होने के बाद पूरी तरह ठीक होने में मरीजों को लगभग 25 दिन का समय लग सकता है। लेकिन छह से 15 साल के बच्चों में वायरस का असर 32 दिनों तक भी देखा गया। इस आयु वर्ग की लड़कियों में 44 दिनों तक वायरस का प्रभाव देखा गया। हालाकि शुरुआती कुछ दिनों के बाद ही वायरस के फैलने की क्षमता कम हो जाती है।

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