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जूट पर कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन का कहर, बारदानों की कीमत छूने लगी आसमान

धान खरीद की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बारदाने की कीमतों में उछाल शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ में 8.50 लाख क्विंटल धान की खरीदी होनी है और इसके लिए 22 करोड़ बारदाने की जरूरत है। कोरोना संक्रमण और जूट बोआई के समय देशव्यापी लाकडाउन के चलते जूट उत्पादन में भारी गिरावट आई है। यही कारण है कि नए और पुराने बारदानों की कीमतें तेजी के साथ बढ़ रही हैं।

बारदाना आपूर्तिकर्ताओं की तरफ से समर्थन मूल्य पर कृषि उपज की खरीदी करने वाले राज्यों को जवाब दे दिया गया है कि उनकी मांग पूरी नहीं की जा सकेगी। इसलिए राज्य अब प्लास्टिक बैग, पुराने बारदाने और पीडीएस के बारदाने ले रहे हैं, लेकिन इसकी व्यवस्था भी मुश्किल है।

40 किलोग्राम की भरती वाले बारदाना की खरीदी पर इस बार 24 से 26 रुपये प्रति नग देने होंगे। बीते साल यह 20 से 22 रुपये प्रति नग पर मिल रहे थे। प्लास्टिक बैग का चलन बढ़ने से यह भी प्रति नग पांच से सात रपये महंगा हो चुका है। नया जूट बारदाना 50 से 55 रुपये प्रति नग की दर पर खरीदा जा सकेगा। 80 किलोग्राम की भरती वाला बारदाना चलन से बाहर होता जा रहा है फिर भी इसकी खरीदी 90 से 100 रुपये की दर से होगी।

खरीफ फसल की तैयारी में लगे किसानों और मिलों को बारदाना की खरीदी पर झटका लगने वाला है। नए बारदाने की कीमत तो क्रय शक्ति से बाहर जा चुकी है। वहीं पुराना बारदाना भी झटका देने के लिए बाजार में पहुंच चुका है। और तो और सुतली तक का भाव बढ़ गया है। इसके पीछे की वजह कोरोना संक्रमण है। देश में जूट उत्पादक राज्यों में पश्चिम बंगाल का नाम पहले नंबर पर है, लेकिन इस बार मार्च महीने में बोआई के समय में कोरोना वायरस के खौफ कारण जूट उत्पादक किसानों घरों में कैद हो गए थे।

ये हैं बड़े खरीदार राज्य

बारदाना खरीदने वालों में छत्तीसगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश और केरल प्रमुख हैं। इसलिए इन राज्यों के सामने अब पुराना बारदाना या फिर प्लास्टिक बैग और पीडीएस के बारदाने विकल्प रह गए हैं।

छत्‍तीसगढ़ के स्‍टाकिस्‍ट विनय कुमार का कहना है कि कोरोना संकट के कारण इस बार जूट का रकबा घट गया है। उत्पादन कम होने के कारण बारदाने का संकट अभी से ही सामने आने लगा है। जूट मिलों ने आपूर्ति करने से इन्कार कर दिया है। हम भी आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।

धान खरीद की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बारदाने की कीमतों में उछाल शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ में 8.50 लाख क्विंटल धान की खरीदी होनी है और इसके लिए 22 करोड़ बारदाने की जरूरत है। कोरोना संक्रमण और जूट बोआई के समय देशव्यापी लाकडाउन के चलते जूट उत्पादन में भारी गिरावट आई है। यही कारण है कि नए और पुराने बारदानों की कीमतें तेजी के साथ बढ़ रही हैं।

बारदाना आपूर्तिकर्ताओं की तरफ से समर्थन मूल्य पर कृषि उपज की खरीदी करने वाले राज्यों को जवाब दे दिया गया है कि उनकी मांग पूरी नहीं की जा सकेगी। इसलिए राज्य अब प्लास्टिक बैग, पुराने बारदाने और पीडीएस के बारदाने ले रहे हैं, लेकिन इसकी व्यवस्था भी मुश्किल है।

40 किलोग्राम की भरती वाले बारदाना की खरीदी पर इस बार 24 से 26 रुपये प्रति नग देने होंगे। बीते साल यह 20 से 22 रुपये प्रति नग पर मिल रहे थे। प्लास्टिक बैग का चलन बढ़ने से यह भी प्रति नग पांच से सात रपये महंगा हो चुका है। नया जूट बारदाना 50 से 55 रुपये प्रति नग की दर पर खरीदा जा सकेगा। 80 किलोग्राम की भरती वाला बारदाना चलन से बाहर होता जा रहा है फिर भी इसकी खरीदी 90 से 100 रुपये की दर से होगी।

खरीफ फसल की तैयारी में लगे किसानों और मिलों को बारदाना की खरीदी पर झटका लगने वाला है। नए बारदाने की कीमत तो क्रय शक्ति से बाहर जा चुकी है। वहीं पुराना बारदाना भी झटका देने के लिए बाजार में पहुंच चुका है। और तो और सुतली तक का भाव बढ़ गया है। इसके पीछे की वजह कोरोना संक्रमण है। देश में जूट उत्पादक राज्यों में पश्चिम बंगाल का नाम पहले नंबर पर है, लेकिन इस बार मार्च महीने में बोआई के समय में कोरोना वायरस के खौफ कारण जूट उत्पादक किसानों घरों में कैद हो गए थे।

ये हैं बड़े खरीदार राज्य

बारदाना खरीदने वालों में छत्तीसगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश और केरल प्रमुख हैं। इसलिए इन राज्यों के सामने अब पुराना बारदाना या फिर प्लास्टिक बैग और पीडीएस के बारदाने विकल्प रह गए हैं।

छत्‍तीसगढ़ के स्‍टाकिस्‍ट विनय कुमार का कहना है कि कोरोना संकट के कारण इस बार जूट का रकबा घट गया है। उत्पादन कम होने के कारण बारदाने का संकट अभी से ही सामने आने लगा है। जूट मिलों ने आपूर्ति करने से इन्कार कर दिया है। हम भी आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।

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