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न भितरघात और न नाराजगी, फिर कैसे मिली हार? अपनी शिकस्त के कारण नहीं जान पा रही कांग्रेस

मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश उपचुनाव में कांग्रेस के हाथ करारी हार लगी है, लेकिन इस बड़ी हार के बाद भी कांग्रेस के सामने उन हार के कारणों को तलाशना चुनौती बना हुआ है और शुरूआती समीक्षा के दौरान जो पहलू सामने आ रहे हैं, वह पार्टी नेताओं के साथ राजनीतिक जानकारों को चौंकाने का काम कर रहे हैं। दरअसल इस चुनाव में हार के प्रमुख फैक्टर से कांग्रेस शुरूआत से लेकर अंत तक दूर रही, पूरे चुनावी अभियान में न तो कांग्रेस में कहीं भितरघात देखने को मिला और न ही किसी भी स्तर पर आंतरिक या बाहरी राजनीति। इसके बाद भी चुनाव में मिली यह करारी हार, पार्टी नेताओं को परेशान करने का काम कर रही है। इस संबंध में आयोजित हुई विधायक दल की बैठक में कमलनाथ ने लगभग तीन दिन पहले सभी नेताओं से 7 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन वह रिपोर्ट तैयार करना भी पार्टी नेताओं के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

बूथ स्तर खाक छान रहे नेता
पार्टी नेताओं के मुताबिक, पूरे चुनावी अभियान में सबकुछ कांग्रेस के सकारात्मक था। चुनावी प्रचार से लेकर पोलिंग तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जी तोड़ मेहनत की, फिर भी नतीजे कांग्रेस के उलट आए। इस संबंध में माना जा रहा है, कि कांग्रेस की तैयारियों पर भाजपा की तैयारी कुछ ज्यादा ही भारी साबित हुई और वह इस उपचुनाव में बाजी मार ले गई। हालांकि कोई भी कांग्रेस नेता इस बात को स्वीकार तो नहीं कर पा रहा, और न ही इस फैक्टर को पीसीसी चीफ कमलनाथ के सामने अपनी हार का कारण बताकर पेश किया जा सकता है, इसलिए पार्टी के नेता लगातार जमीनी स्तर पर खाक छानते हुए हार के कारण तलाशने में जुटे हुए हैं।

कांग्रेस पर हावी हो गया उपचुनाव का मिथक !
कहा जाता है, कि उपचुनाव में अक्सर सत्ता पक्ष हावी रहता है। लेकिन मध्यप्रदेश में कांग्रेस का मानना था, कि यह उपचुनाव में मौजूदा शिवराज सरकार का अस्थिर कर देगा। हालांकि शुरूआती समय में कांग्रेस का जोश देखते ही बन रहा था, और उसने एक बार के लिए पूरी बीजेपी को असहज कर दिया। लेकिन वोट डालते वक्त शायद जनता के जहन में ये ख्याल आ ही गया होगा, कि उनके एक वोट से कांग्रेस और कमलनाथ का क्या भला होना है ? माना जा रहा है, कि इसी सोच ने जनता का मन अंत समय में पलट दिया और वोटरों ने प्रदेश की शिवराज सरकार को और मजबूती दे दी। संभवत: यह मिथक कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा घाटे का सौदा रहा।

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