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पादरी और पास्टर के खिलाफ गांव में लगे पोस्टर, कांकेर के कुरालठेमली ग्राम सभा ने किया प्रस्ताव पारित

कांकेर: कुरालठेमली गांव में ग्रामीणों ने पादरी और पास्टर के खिलाफ पोस्टर लगा दिया है. पोस्टर के जरिए ईसाई धर्म मान चुके लोगों का गांव में प्रवेश वर्जित किए जाने की सूचना दी गई है. पादरी और पास्टर के खिलाफ ये पोस्टर गांव के बाहर लगाए गए हैं जहां से लोगों की गांव में एंट्री होती है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ग्राम सभा की बैठक कर ग्राम सभा में इसके लिए प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव पारित होने के बाद पादरी-पास्टर का प्रवेश वर्जित किए जाने का बोर्ड लगाया गया है. अकेले कांकेर जिले में अबतक इस तरह के 15 पोस्टर लग चुके हैं. गांव वालों का कहना है कि जो ईसाई धर्म मान चुके हैं उनका यहां आना वर्जित है. ऐसे लोगों के आने से हमारी सांस्कृतिक पहचान खत्म हो जाएगी.

पादरी और पास्टर के प्रवेश वर्जित किए जाने का लगा पोस्टर

धर्मांतरण की शिकायतों के बीच सबसे पहला बोर्ड कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र अंतर्गत कुड़ाल गांव में लगा था. यहां भी पहले ग्राम सभा का आयोजन किया गया और यहां से प्रस्ताव पारित करके पोस्टर लगाया गया. स्थानीय लोग कहते हैं कि अबतक 15 गांवों के बाहर इस तरह का पोस्टर लगाया जा चुका है. पोस्टर के जरिए ये कहा गया है कि इस गांव और पंचायत में ईसाई पादरी और पास्टर का प्रवेश वर्जित है.

ग्रामीणों का आरोप

गांव के ग्रामीणों ने बताया कि धर्मांतरण होने के बाद हमारे आदिवासी रूढ़ि परंपरा संस्कृति को नहीं मानते हैं. हमारे गांव कुरालठेमली में कोई भी बाहर से पादरी पास्टर या कोई मत्तांतरण व्यक्ति आता है तो ग्राम सभा के प्रस्ताव अनुसार कार्रवाई की जाएगी. अबतक पादरी और पास्टर के प्रवेश को लेकर परवी, जनकपुर, भीरागांव, घोडागांव, जुनवानी, हवेचुर, घोटा, घोटिया, सुलंगी, टेकाठोडा, बांसला, जामगांव, चारभाठा और मुसुरपुट्टा शामिल गांव के नाम शामिल हैं.

कांकेर: कुरालठेमली गांव में ग्रामीणों ने पादरी और पास्टर के खिलाफ पोस्टर लगा दिया है. पोस्टर के जरिए ईसाई धर्म मान चुके लोगों का गांव में प्रवेश वर्जित किए जाने की सूचना दी गई है. पादरी और पास्टर के खिलाफ ये पोस्टर गांव के बाहर लगाए गए हैं जहां से लोगों की गांव में एंट्री होती है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ग्राम सभा की बैठक कर ग्राम सभा में इसके लिए प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव पारित होने के बाद पादरी-पास्टर का प्रवेश वर्जित किए जाने का बोर्ड लगाया गया है. अकेले कांकेर जिले में अबतक इस तरह के 15 पोस्टर लग चुके हैं. गांव वालों का कहना है कि जो ईसाई धर्म मान चुके हैं उनका यहां आना वर्जित है. ऐसे लोगों के आने से हमारी सांस्कृतिक पहचान खत्म हो जाएगी.

पादरी और पास्टर के प्रवेश वर्जित किए जाने का लगा पोस्टर

धर्मांतरण की शिकायतों के बीच सबसे पहला बोर्ड कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र अंतर्गत कुड़ाल गांव में लगा था. यहां भी पहले ग्राम सभा का आयोजन किया गया और यहां से प्रस्ताव पारित करके पोस्टर लगाया गया. स्थानीय लोग कहते हैं कि अबतक 15 गांवों के बाहर इस तरह का पोस्टर लगाया जा चुका है. पोस्टर के जरिए ये कहा गया है कि इस गांव और पंचायत में ईसाई पादरी और पास्टर का प्रवेश वर्जित है.

ग्रामीणों का आरोप

गांव के ग्रामीणों ने बताया कि धर्मांतरण होने के बाद हमारे आदिवासी रूढ़ि परंपरा संस्कृति को नहीं मानते हैं. हमारे गांव कुरालठेमली में कोई भी बाहर से पादरी पास्टर या कोई मत्तांतरण व्यक्ति आता है तो ग्राम सभा के प्रस्ताव अनुसार कार्रवाई की जाएगी. अबतक पादरी और पास्टर के प्रवेश को लेकर परवी, जनकपुर, भीरागांव, घोडागांव, जुनवानी, हवेचुर, घोटा, घोटिया, सुलंगी, टेकाठोडा, बांसला, जामगांव, चारभाठा और मुसुरपुट्टा शामिल गांव के नाम शामिल हैं.

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