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मनी लांड्रिंग मामले में चंदा कोचर के पति दीपक गिरफ्तार

नई दिल्ली। आइसीआइसीआइ बैंक-वीडियोकॉन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को आइसीआइसीआइ बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले दिन में ईडी ने उन्हें अपने दिल्ली कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया था।

अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि दीपक कोचर को जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया है। यह मामला वीडियोकॉन ग्रुप को बैंक लोन देने में कथित अनियमितताओं और मनी लांड्रिंग की जांच से जुड़ा है। इस साल जनवरी में ईडी ने चंदा कोचर, दीपक कोचर और उनके स्वामित्व व नियंत्रण वाली कंपनियों की 78.15 करोड़ रुपये की चल-अचल परिसंपत्तियों को भी जब्त कर लिया था। इनमें तमिलनाडु और महाराष्ट्र स्थित फ्लैट, जमीन, नकदी, मशीनें एवं संयंत्र शामिल हैं। मालूम हो कि वीडियोकॉन ग्रुप ऑफ कंपनीज को गैरकानूनी तरीके से 1,875 करोड़ का कर्ज मंजूर करने के लिए दर्ज की गई एफआइआर के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत मामला दर्ज करके जांच शुरू की थी।

3250 करोड़ का लोन मामले में हुई गिरफ्तारी 

दीपक कोचर की यह गिरफ्तारी ईडी ने वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमुख वेणुगोपाल धूत को आईसीआईसीआई बैंक की ओर से 3250 करोड़ रुपये का लोन दिए जाने के मामले में की है। इस मामले में यह पहली बड़ी गिरफ्तारी है। ईडी आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन समूह को दिए गये ऋण मामले में अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और कई अन्य के खिलाफ जांच कर रही थी। कुछ दिन पहले ही दूत समेत चंदा कोचर और उनके पति के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। इस मामले में चंदा कोचर के देवर से भी पूछताछ हुई थी।

क्या है मामला

ईडी के मुताबिक, जांच में पता चला कि चंदा कोचर की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को स्वीकृत किए गए 300 करोड़ रुपये के कर्ज में से 64 करोड़ रुपये आठ सितंबर, 2009 को दीपक कोचर के स्वामित्व वाली नूपावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में नूपावर रिन्यूएबल्स लिमिटेड) में स्थानांतरित किए गए थे। वीडियोकॉन ने यह रकम कर्ज मंजूर होने के एक दिन बाद स्थानांतरित की थी। इसके बाद इस रकम से दीपक कोचर की कंपनी ने 10.65 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था।

नई दिल्ली। आइसीआइसीआइ बैंक-वीडियोकॉन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को आइसीआइसीआइ बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले दिन में ईडी ने उन्हें अपने दिल्ली कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया था।

अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि दीपक कोचर को जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया है। यह मामला वीडियोकॉन ग्रुप को बैंक लोन देने में कथित अनियमितताओं और मनी लांड्रिंग की जांच से जुड़ा है। इस साल जनवरी में ईडी ने चंदा कोचर, दीपक कोचर और उनके स्वामित्व व नियंत्रण वाली कंपनियों की 78.15 करोड़ रुपये की चल-अचल परिसंपत्तियों को भी जब्त कर लिया था। इनमें तमिलनाडु और महाराष्ट्र स्थित फ्लैट, जमीन, नकदी, मशीनें एवं संयंत्र शामिल हैं। मालूम हो कि वीडियोकॉन ग्रुप ऑफ कंपनीज को गैरकानूनी तरीके से 1,875 करोड़ का कर्ज मंजूर करने के लिए दर्ज की गई एफआइआर के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत मामला दर्ज करके जांच शुरू की थी।

3250 करोड़ का लोन मामले में हुई गिरफ्तारी 

दीपक कोचर की यह गिरफ्तारी ईडी ने वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमुख वेणुगोपाल धूत को आईसीआईसीआई बैंक की ओर से 3250 करोड़ रुपये का लोन दिए जाने के मामले में की है। इस मामले में यह पहली बड़ी गिरफ्तारी है। ईडी आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन समूह को दिए गये ऋण मामले में अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और कई अन्य के खिलाफ जांच कर रही थी। कुछ दिन पहले ही दूत समेत चंदा कोचर और उनके पति के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। इस मामले में चंदा कोचर के देवर से भी पूछताछ हुई थी।

क्या है मामला

ईडी के मुताबिक, जांच में पता चला कि चंदा कोचर की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को स्वीकृत किए गए 300 करोड़ रुपये के कर्ज में से 64 करोड़ रुपये आठ सितंबर, 2009 को दीपक कोचर के स्वामित्व वाली नूपावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में नूपावर रिन्यूएबल्स लिमिटेड) में स्थानांतरित किए गए थे। वीडियोकॉन ने यह रकम कर्ज मंजूर होने के एक दिन बाद स्थानांतरित की थी। इसके बाद इस रकम से दीपक कोचर की कंपनी ने 10.65 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था।

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