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मानसिक इलाज में दवा नहीं मिलने पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

नई दिल्ली सरकार संचालित या वित्त पोषित स्वास्थ्य केंद्रों में मानसिक बीमारी के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता नहीं होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ इस सिलसिले में दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गई है।

याचिका में अधिकारियों से अपने राज्यों में आवश्यक दवाओं की सूची को अधिसूचित करने और मानसिक बीमारी से पीडि़त व्यक्तियों को मुफ्त में दवा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु के आठ न्यायिक अधिकारियों की याचिका खारिज कर दी। इन न्यायिक अधिकारियों ने खुद को मद्रास हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने पर विचार करने की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के कोलेजियम द्वारा जजों के रूप में नियुक्ति के लिए भेजी गई सिफारिशों को वापस करने का निर्देश देने की मांग भी की थी

इन न्यायिक अधिकारियों की शिकायत थी कि जिला जजों के कैडर में वरिष्ठतम होने के बावजूद उनकी अनदेखी की गई है और उनसे जूनियर जजों को हाई कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की गई है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े, जस्टिस एसए बोपन्ना और वी रामासुब्रह्माण्यम की पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि याचिकाकर्ताओं का दावा तर्कसंगत नहीं है।

SC ने जिला जज के खिलाफ यौन उत्पी़ड़न की जांच रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक जिला जज के खिलाफ यौन उत्पी़़डन आरोपों की अनुशासनिक जांच पर रोक लगा दी है। एक महिला न्यायिक अधिकारी ने जिला न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाया है। शीषर्ष कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से जवाब मांगा है।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ कहा कि जब कोई ऊपरी अदालत के जज के रूप में प्रोन्नत के लिए विचार करने के क्षेत्र में आता है तो अब यह एक परंपरा–सी बन गई है। शीषर्ष कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने जिला न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पी़़डन जांच को हरी झंडी दे दी थी। जिला न्यायाधीश के नाम पर हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रोन्नत किए जाने पर विचार होना था।

नई दिल्ली सरकार संचालित या वित्त पोषित स्वास्थ्य केंद्रों में मानसिक बीमारी के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता नहीं होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ इस सिलसिले में दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गई है।

याचिका में अधिकारियों से अपने राज्यों में आवश्यक दवाओं की सूची को अधिसूचित करने और मानसिक बीमारी से पीडि़त व्यक्तियों को मुफ्त में दवा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु के आठ न्यायिक अधिकारियों की याचिका खारिज कर दी। इन न्यायिक अधिकारियों ने खुद को मद्रास हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने पर विचार करने की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के कोलेजियम द्वारा जजों के रूप में नियुक्ति के लिए भेजी गई सिफारिशों को वापस करने का निर्देश देने की मांग भी की थी

इन न्यायिक अधिकारियों की शिकायत थी कि जिला जजों के कैडर में वरिष्ठतम होने के बावजूद उनकी अनदेखी की गई है और उनसे जूनियर जजों को हाई कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की गई है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े, जस्टिस एसए बोपन्ना और वी रामासुब्रह्माण्यम की पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि याचिकाकर्ताओं का दावा तर्कसंगत नहीं है।

SC ने जिला जज के खिलाफ यौन उत्पी़ड़न की जांच रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक जिला जज के खिलाफ यौन उत्पी़़डन आरोपों की अनुशासनिक जांच पर रोक लगा दी है। एक महिला न्यायिक अधिकारी ने जिला न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाया है। शीषर्ष कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से जवाब मांगा है।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ कहा कि जब कोई ऊपरी अदालत के जज के रूप में प्रोन्नत के लिए विचार करने के क्षेत्र में आता है तो अब यह एक परंपरा–सी बन गई है। शीषर्ष कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने जिला न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पी़़डन जांच को हरी झंडी दे दी थी। जिला न्यायाधीश के नाम पर हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रोन्नत किए जाने पर विचार होना था।

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