सिंगरौली: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल शनिवार को सिंगरौली जिले के विशेष प्रवास पर थे। इस सांगठनिक और प्रशासनिक दौरे के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश के जनप्रतिनिधियों से की गई सादगी और मितव्ययिता (कम खर्चीली व्यवस्था) की अपील का कड़ाई से पालन करते हुए सादगी की एक बड़ी मिसाल पेश की। सिंगरौली पहुंचते ही अमूमन मुख्यमंत्रियों के साथ चलने वाले भारी-भरकम वीआईपी सुरक्षा काफिले के बजाय सीएम डॉ. मोहन यादव तमाम स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ एक सामान्य टूरिस्ट बस में सवार हुए। इसके बाद वे बस में बैठकर ही मुख्य कार्यक्रम स्थल एनसीएल (NCL) ग्राउंड पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपना भव्य शासकीय काफिला पूरी तरह से त्याग दिया। यह अनोखा कदम उठाकर उन्होंने समूचे राजनीतिक हलके में एक बड़ा संदेश दिया कि किसी भी जनप्रतिनिधि की वास्तविक पहचान सरकारी प्रोटोकॉल और तामझाम से नहीं, बल्कि जनता का निश्छल प्रेम और उसकी सेवा करने से होती है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ इस टूरिस्ट बस में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री एवं सिंगरौली जिले की प्रभारी मंत्री संपतिया उइके, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री राधा सिंह, क्षेत्रीय सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह, देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम, धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम, सिंहावल विधायक विश्वामित्र पाठक तथा मध्यप्रदेश गृह एवं अधोसंरचना निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन मुख्य रूप से सवार थे। इसके अलावा सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल, नगर निगम अध्यक्ष देवेश पाण्डेय, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि कांतदेव सिंह एवं सुंदरलाल शाह सहित कई अन्य स्थानीय नेता भी मुख्यमंत्री के साथ बस की सह-यात्री बने।
🤝 जनता से जुड़ाव और जनसेवा के मूल्यों के साथ काम करने की प्रेरणा: सीएम डॉ. मोहन यादव का सरल अंदाज नागरिकों को भाया
सिंगरौली आगमन पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह बेहद सरल, सुलभ और सहज अंदाज वहां मौजूद आम नागरिकों और सोशल मीडिया पर लोगों को खूब भा गया। बस से सीधे कार्यक्रम स्थल पहुंचकर मुख्यमंत्री ने समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की पहचान केवल बड़े पद और प्रशासनिक प्रोटोकॉल से नहीं मापी जानी चाहिए, बल्कि उनका जनता से सीधा जुड़ाव, सादगी और निस्वार्थ सेवा भावना ही सर्वोपरि है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री का यह जमीनी कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस मितव्ययितापूर्ण और वीआईपी कल्चर विरोधी दृष्टिकोण को भी पूरी तरह से प्रतिबिंबित करता है, जिसमें देश के सभी जनप्रतिनिधियों को सदैव सादगी, कड़े अनुशासन और जनसेवा के मूल मूल्यों के साथ जनता के बीच रहकर काम करने की निरंतर प्रेरणा दी जाती है।
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