मुंबई/राजकोट (अनिल बेदाग): “जब परिवार साथ छोड़ देता है, तब सबसे ज्यादा जरूरत सम्मान और अपनापन की होती है।” यही भावना गुजरात के राजकोट स्थित ‘विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिसर’ सद्भावना वृद्धाश्रम की पहचान बन चुकी है। संस्था से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ आश्रय देना नहीं, बल्कि बेसहारा, बीमार और बिस्तर पर पड़े बुजुर्गों को परिवार जैसा स्नेह देना है।
🏗️ 500 करोड़ की लागत से बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा निःशुल्क वृद्धाश्रम
संस्था के अनुसार, पिछले दस वर्षों से यहां निःसंतान, दिव्यांग, कैंसर और कोमा से जूझ रहे बुजुर्गों की पूरी तरह निःशुल्क सेवा की जा रही है। वर्तमान में 700 से अधिक बुजुर्ग यहां रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या बिस्तर पर पड़े मरीजों की है। प्रतिनिधियों ने बताया, “500 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा नया परिसर दुनिया के सबसे बड़े निःशुल्क वृद्धाश्रमों में शामिल होगा, जहां 5000 जरूरतमंद बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था होगी। हमारा प्रयास है कि कोई भी बुजुर्ग अकेलापन या उपेक्षा महसूस न करे।”
🏥 24 घंटे मेडिकल सुविधा और भावनात्मक सहारे की अनूठी पहल
वृद्धाश्रम में 24 घंटे मेडिकल सुविधा, फिजियोथेरेपी सेंटर, सत्संग हॉल, मंदिर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आधुनिक रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। संस्था का मानना है कि बुजुर्गों को सिर्फ दवा नहीं, बल्कि सम्मान, संवाद और भावनात्मक सहारा भी चाहिए। संस्था ने लोगों से अपील की है कि यदि आसपास कोई बेसहारा या लाचार बुजुर्ग दिखाई दे, तो उन्हें सद्भावना वृद्धाश्रम तक पहुंचाने में सहयोग करें।
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