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Bihar Vidhan Sabha Election 2020 परिसीमन के साथ बदलता रहा कदवा विस क्षेत्र का भूगोल, 1952 में अस्तित्व में आया था

हाल के चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में डंडखोरा प्रखंड के मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रही। परिसीमन के बाद वोटों के बदले समीकरण के तहत 2010 में भाजपा के भोला राय निर्वाचित हुए थे। जबकि गत चुनाव में कांग्रेस के शकील अहमद खान ने बाजी मारी थी।

कटिहार। 1952 के प्रथम आम चुनाव से हीअस्तित्व में आया कदवा विधानसभा का भूगोल परिसीमन के चलते बदलता रहा है। अलग क्षेत्र के मतदाताओं का विधानसभा में जुड़ाव व घटाव से यहां की चुनावी गणित भी प्रभावित रही है और प्रत्याशियों के जीत हार का समीकरण भी बदलता रहा है। 1952 से लेकर 67 तक कदवा विधानसभा के नाम से विधायक चुने जाते थे। 1967 से 77 तक दस वर्ष इसे आजमनगर विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता रहा। इसके बाद इसका पिफर से परिसम हुआ।

1977 में पुन: कदवा विधानसभा अस्तित्व में आया

1977 में पुन: कदवा विधानसभा अस्तित्व में आया। इसमें आजमनगर के नौ पंचायत को कदवा विधानसभा में सम्मिलित कर दिया गया था। बाद में 2008 में हु्ए परिसीमन में आजमनगर के पंचायत को हटा कर डंडखोरा प्रखंड को कदवा विधानसभा का हिस्सा बना दिया गया। विधानसभा के बदलते भौगोलिक मानचित्र के आधार पर प्रत्याशियों की भी स्थिति-परिस्थिति बदलती रही हैद्य वहीं विधानसभा में अलग प्रखंडों के जुडऩे से वहां के मतदाता भी समय समय पर चुनावी अभियान में वोट के माध्यम से प्रत्याशियों के चयन में निर्णायक भूमिका अदा किया। जिस वक्त आजमनगर के पंचायत इस विधानसभा से जुड़े थे तो उस दौरान अब्दुल जलील ने दो बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया था। पहली बार 1990 में वे निर्दलीय विजयी हुए थे। पुन: 2005 में भी वे राकांपा के टिकट पर जीते थे।

परिसीमन के बाद वोटों के बदले समीकरण

हाल के चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में डंडखोरा प्रखंड के मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रही। परिसीमन के बाद वोटों के बदले समीकरण के तहत 2010 में भाजपा के भोला राय निर्वाचित हुए थे। जबकि गत चुनाव में कांग्रेस के शकील अहमद खान ने बाजी मारी थी। चुनाव के समय प्रत्याशी भी क्षेत्रवार वोटों का आकलन कर ही अपने चुनावी अभियान का संचालन करते हैं।

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