गिरिडीह जिले के जमुआ थाना क्षेत्र के तीनमहुआ गांव में 29 मई को प्रतिबंधित पशु का सिर मिलने के बाद से पिछले छह दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई थी. 3 जून को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा स्थानीय धार्मिक स्थल पर अचानक पथराव किए जाने से माहौल और बिगड़ गया. हालांकि, जिला प्रशासन और पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप व सूझबूझ से कुछ ही घंटों के भीतर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया गया.
👮 प्रशासन की बड़ी सख्ती: 8 उपद्रवी गिरफ्तार, मामला दर्ज
घटना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार किया. गिरिडीह के डीसी रामनिवास यादव और एसपी डॉ. बिमल कुमार ने मौके पर उच्चाधिकारियों की टीम को रवाना किया. खोरी महुआ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अमरेंद्र कुमार ने आधिकारिक पुष्टि की है कि माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है और अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
🛡️ एएसपी चौधरी और भारी पुलिस बल तैनात, पथराव में चौकीदार घायल
धार्मिक स्थल पर पथराव की घटना के बाद डीसी और एसपी ने न सिर्फ पूरी स्थिति की पल-पल की जानकारी ली, बल्कि तुरंत ही पुलिस सुरक्षा बलों के साथ कई थानों की पुलिस को भी मौके पर तैनात कर दिया. बुधवार की शाम से गुरुवार की सुबह तक खोरी महुआ एसडीपीओ के साथ कई वरिष्ठ पदाधिकारी मुस्तैद रहे. स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए दूसरे जिले से भी अतिरिक्त पुलिस बल और अधिकारियों को यहां पर प्रतिनियुक्त किया गया है. एएसपी बिरेन्द्र कुमार चौधरी भी सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालते हुए खुद मौके पर डटे हुए हैं. बताया जा रहा है कि उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास में एक स्थानीय चौकीदार भी पथराव की चपेट में आकर घायल हो गया है.
🏍️ उपद्रवियों पर कड़ा प्रहार: दो दर्जन से ज्यादा बाइकें जब्त
शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. डीसी और एसपी के सख्त निर्देश पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक उपद्रवियों की दो दर्जन से अधिक बाइकों को जब्त कर लिया है. पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारी क्षेत्र की हर संदिग्ध गतिविधि और सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखे हुए हैं.
❓ कैसे बढ़ा विवाद? पुलिस कार्रवाई में देरी और बाहरी तत्वों का हाथ
स्थानीय लोगों के अनुसार, 29 मई को प्रतिबंधित पशु का कटा हुआ सिर मिलने के बाद से ही पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था. ग्रामीणों ने पशु वध करने वाले दोषियों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी. उस समय जमुआ इंस्पेक्टर और थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था, लेकिन समय पर कार्रवाई न होने से लोगों का असंतोष बढ़ता गया. इसी बीच बाहरी तत्वों के क्षेत्र में प्रवेश करने से स्थिति और बिगड़ गई, जिसके परिणामस्वरूप बुधवार शाम को धार्मिक स्थल पर पथराव की यह निंदनीय घटना घटित हो गई.
🕊️ शांति बनाए रखने की अपील: भ्रामक अफवाहों से बचने की हिदायत
पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए एएसपी बिरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि प्रतिबंधित पशु का सिर मिलने की घटना के बाद कुछ बाहरी लोगों के गांव में पहुंचने से माहौल खराब हुआ. भीड़ को नियंत्रित करने पहुंचे चौकीदार पर भी पथराव किया गया, जो फिलहाल घायल हैं और उनका इलाज जारी है. उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि पुलिस दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है, इसलिए लोग किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें.
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