हार्ट अटैक के बाद कई मरीजों की जान बचाने के लिए डॉक्टर एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) के जरिए स्टेंट लगाते हैं। स्टेंट बंद या संकरी हुई कोरोनरी धमनी को खोलने का काम करता है, जिससे हृदय तक रक्त का प्रवाह सामान्य हो जाता है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह धारणा बन जाती है कि एक बार स्टेंट लग जाने के बाद उन्हें दोबारा कभी हार्ट अटैक नहीं आएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है। स्टेंट केवल उस धमनी की रुकावट को दूर करता है, जहां ब्लॉकेज मौजूद होती है। लेकिन शरीर में नई जगहों पर ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया जारी रह सकती है। ऐसे में अगर जीवनशैली और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो भविष्य में फिर से हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है। डॉक्टरों के अनुसार, स्टेंट हार्ट अटैक के इलाज का एक अहम हिस्सा है, लेकिन यह भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक की पूरी गारंटी नहीं देता। स्टेंट का काम प्रभावित धमनी को खोलना और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाना होता है। लेकिन हृदय रोग की मुख्य वजह—यानी धमनियों में प्लाक और कोलेस्ट्रॉल जमा होने की प्रक्रिया (Atherosclerosis)—शरीर की अन्य धमनियों में भी जारी रह सकती है। यही कारण है कि स्टेंट लगवाने के बाद भी मरीज को अपनी सेहत का पहले की तरह ही ध्यान रखना पड़ता है। दूसरी धमनियों में नई ब्लॉकेज बनना: स्टेंट सिर्फ उसी धमनी का इलाज करता है जिसमें पहले से रुकावट थी। समय के साथ दूसरी कोरोनरी धमनियों में भी कोलेस्ट्रॉल और प्लाक जमा हो सकते हैं, जिससे भविष्य में नई ब्लॉकेज बन सकती है। स्टेंट के अंदर दोबारा संकुचन: कुछ मामलों में स्टेंट के अंदर अतिरिक्त टिश्यू बनने लगता है, जिससे धमनी फिर से संकरी हो सकती है। आधुनिक ‘ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट’ में यह जोखिम पहले की तुलना में काफी कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। स्टेंट में खून का थक्का बनना: अगर मरीज डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीप्लेटलेट दवाएं (Antiplatelet Drugs) समय पर नहीं लेता या इलाज में लापरवाही करता है, तो स्टेंट के भीतर खून का थक्का बन सकता है। यह स्थिति बेहद गंभीर होती है और अचानक हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। पुरानी बीमारियों पर नियंत्रण न होना: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और धूम्रपान जैसी समस्याएं स्टेंट लगने के बाद भी हृदय को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। धूम्रपान जारी रखना: सिगरेट और तंबाकू में मौजूद निकोटीन धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और नई ब्लॉकेज बनने की संभावना बढ़ा देता है। दवाएं समय पर न लेना: कई मरीज कुछ महीनों बाद खुद ही दवाएं बंद कर देते हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करने से स्टेंट में थक्का बनने का खतरा बढ़ सकता है। खानपान में लापरवाही: अधिक तला-भुना भोजन, जंक फूड, ज्यादा नमक और मीठे पेय पदार्थ लगातार खाने से कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। शारीरिक गतिविधि से दूरी: अगर स्टेंट लगने के बाद मरीज बिल्कुल सक्रिय नहीं रहता है, तो मोटापा और अन्य जोखिम कारक बढ़ सकते हैं। नियमित जांच न कराना: स्टेंट लगने के बाद समय-समय पर कार्डियोलॉजिस्ट (Cardiologist) से जांच कराना जरूरी होता है, ताकि किसी भी नई समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके। स्टेंट लगने के बाद स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी कदम है। संतुलित आहार लें, धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं, वजन नियंत्रित रखें, रोजाना व्यायाम करें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लें। इसके साथ ही अपने ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराते रहें, ताकि आपका दिल हमेशा सेहतमंद रहे।क्या स्टेंट हार्ट अटैक से पूरी तरह बचा सकता है?
स्टेंट के बाद भी क्यों आ सकता है हार्ट अटैक?
आपकी ये गलतियां बढ़ा सकती हैं दोबारा हार्ट अटैक का जोखिम
स्टेंट लगने के बाद कैसे रखें दिल का ख्याल?
यह खबर आपको कैसी लगी?
हार्ट अटैक के बाद कई मरीजों की जान बचाने के लिए डॉक्टर एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) के जरिए स्टेंट लगाते हैं। स्टेंट बंद या संकरी हुई कोरोनरी धमनी को खोलने का काम करता है, जिससे हृदय तक रक्त का प्रवाह सामान्य हो जाता है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह धारणा बन जाती है कि एक बार स्टेंट लग जाने के बाद उन्हें दोबारा कभी हार्ट अटैक नहीं आएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है। स्टेंट केवल उस धमनी की रुकावट को दूर करता है, जहां ब्लॉकेज मौजूद होती है। लेकिन शरीर में नई जगहों पर ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया जारी रह सकती है। ऐसे में अगर जीवनशैली और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो भविष्य में फिर से हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है।
क्या स्टेंट हार्ट अटैक से पूरी तरह बचा सकता है?
डॉक्टरों के अनुसार, स्टेंट हार्ट अटैक के इलाज का एक अहम हिस्सा है, लेकिन यह भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक की पूरी गारंटी नहीं देता। स्टेंट का काम प्रभावित धमनी को खोलना और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाना होता है। लेकिन हृदय रोग की मुख्य वजह—यानी धमनियों में प्लाक और कोलेस्ट्रॉल जमा होने की प्रक्रिया (Atherosclerosis)—शरीर की अन्य धमनियों में भी जारी रह सकती है। यही कारण है कि स्टेंट लगवाने के बाद भी मरीज को अपनी सेहत का पहले की तरह ही ध्यान रखना पड़ता है।
स्टेंट के बाद भी क्यों आ सकता है हार्ट अटैक?
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दूसरी धमनियों में नई ब्लॉकेज बनना: स्टेंट सिर्फ उसी धमनी का इलाज करता है जिसमें पहले से रुकावट थी। समय के साथ दूसरी कोरोनरी धमनियों में भी कोलेस्ट्रॉल और प्लाक जमा हो सकते हैं, जिससे भविष्य में नई ब्लॉकेज बन सकती है।
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स्टेंट के अंदर दोबारा संकुचन: कुछ मामलों में स्टेंट के अंदर अतिरिक्त टिश्यू बनने लगता है, जिससे धमनी फिर से संकरी हो सकती है। आधुनिक ‘ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट’ में यह जोखिम पहले की तुलना में काफी कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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स्टेंट में खून का थक्का बनना: अगर मरीज डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीप्लेटलेट दवाएं (Antiplatelet Drugs) समय पर नहीं लेता या इलाज में लापरवाही करता है, तो स्टेंट के भीतर खून का थक्का बन सकता है। यह स्थिति बेहद गंभीर होती है और अचानक हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।
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पुरानी बीमारियों पर नियंत्रण न होना: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और धूम्रपान जैसी समस्याएं स्टेंट लगने के बाद भी हृदय को नुकसान पहुंचाती रहती हैं।
आपकी ये गलतियां बढ़ा सकती हैं दोबारा हार्ट अटैक का जोखिम
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धूम्रपान जारी रखना: सिगरेट और तंबाकू में मौजूद निकोटीन धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और नई ब्लॉकेज बनने की संभावना बढ़ा देता है।
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दवाएं समय पर न लेना: कई मरीज कुछ महीनों बाद खुद ही दवाएं बंद कर देते हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करने से स्टेंट में थक्का बनने का खतरा बढ़ सकता है।
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खानपान में लापरवाही: अधिक तला-भुना भोजन, जंक फूड, ज्यादा नमक और मीठे पेय पदार्थ लगातार खाने से कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
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शारीरिक गतिविधि से दूरी: अगर स्टेंट लगने के बाद मरीज बिल्कुल सक्रिय नहीं रहता है, तो मोटापा और अन्य जोखिम कारक बढ़ सकते हैं।
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नियमित जांच न कराना: स्टेंट लगने के बाद समय-समय पर कार्डियोलॉजिस्ट (Cardiologist) से जांच कराना जरूरी होता है, ताकि किसी भी नई समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।
स्टेंट लगने के बाद कैसे रखें दिल का ख्याल?
स्टेंट लगने के बाद स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी कदम है। संतुलित आहार लें, धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं, वजन नियंत्रित रखें, रोजाना व्यायाम करें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लें। इसके साथ ही अपने ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराते रहें, ताकि आपका दिल हमेशा सेहतमंद रहे।


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