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जम्मू-कश्मीर: चार पूर्व मुख्यमंत्रियों-स्वजनों को प्राप्त एसएसजी की सुरक्षा अब ज्यादा देर तक सुरक्षा कवच नहीं करेगी प्रदान

एसएसजी का गठन 1996 में जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री डा फारुक अब्दुल्ला के नेतृत्व में तत्कालीन सरकार ने किया था।

श्रीनगर। डा फारुक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद समेत जम्मू कश्मीर के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों व उनके स्वजनों को प्राप्त विशेष सुरक्षा दल (एसएसजी) अब और ज्यादा देर तक सुरक्षा कवच प्रदान नहीं करेगा। करीब 20 साल तक जम्मू कश्मीर में विभिन्न मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला जम्मू कश्मीर पुलिस की एसएसजी जल्द ही इतिहास का हिस्सा बनने जा रही है।

प्रदेश सरकार इसे पूरी तरह भंग करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके होने पर जम्मू कश्मीर के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों व उनके स्वजनों के सुरक्षा चक्र में कटौती होगी और उनकी सुरक्षा का जिम्मा संबधित जिला पुलिस या फिर सुरक्षा विंग संभालेगा। एसएसजी के भंग करने और इसके अधिकारियों, जवानों को उनके साजो सामान समेत जम्मू कश्मीर पुलिस के सुरक्षा विंग और उपराज्यपाल की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे विशेष सुरक्षा बल (एसएसएफ) में भेजा जाएगा।

एसएसजी का गठन 1996 में जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री डा फारुक अब्दुल्ला के नेतृत्व में तत्कालीन सरकार ने किया था। अलबत्ता, जम्मू कश्मीर पुलिस के बैनर तले एक अलग विंग के रुप में इसे मान्यता, इसके नियम और जिम्मेदारियों को जम्मू कश्मीर विशेष सुरक्षा दल एसएसजी,अधिनियम 2000 में परिभाषित किया गया था।

जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के लागू होने के बाद 31 मार्च 2020 में एसएसजी अधिनियम में संशोधन कर,जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों व उनके स्वजनों को सुरक्षा चक्र प्रदान करने के प्रविधान को हटा दिया गया था। एसएसजी में अधिकारियों व जवानों का सेवाकाल पांच से सात साल तक होता है। परिस्थितियों के आधार पर इसमें नियुक्त अधिकारियों व जवानों को समय से पहले भी हटाया जा सकता है।जम्मू कश्मीर पुलिस से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम न छापे जाने की शर्त पर बताया कि एसएसजी का गठन जम्मू कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्रियों और उनके स्वजनों की सुरक्षा के लिए किया गया था। अब जम्मू कश्मीर राज्य समाप्त हो चुका है। केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में ऐसा कोई प्रविधान नहीं है,इसलिए अब एसएसजी को भंग किया जा सकता है या फिर इससे संबधित कानून में व्यापक संशोधन करना होगा।

उन्होंने बताया कि बीते दिनों सुरक्षा समन्वय समिति की सुरक्षा बैठक हुई। यह समिति जम्मू कश्मीर में प्रुमुख राजनीतिक नेताओं और जन प्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित अंतराल पर समीक्षा करते हुए उसमें आवश्यक्तानुसार बदलाव करती है। समिति की बैठक में ही एसएसजी और चारों पूर्व मुख्यमंत्री के स्वजनों के सुरक्षा चक्र पर विस्तार से विचार विमर्शहुआ। चर्चा के बाद समिति ने एसएसजी को भंग करने और पूरी तरह भंग किए जाने की प्रक्रिया के संपन्न होने तक इसके अधिकारियेां व जवानों की संख्या में कटौती का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि एसएसजी में अब डीआईजी और एसएसपी रैंक के अधिकारी की नियुक्ति नहीं की जाएगी। इसमें डीएसपी रैंक के अधिकारियों के पद भी घटाए जाएंगे और जब इसे पूरी तरह भंग नहीं किया जाता, तब तक एएसपी या फिर डीएसपी रैंक का अधिकारी इसका जिम्मा संभालेगा।उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी इसे पूरी तरह भंग किए जाने के फैसले के हक में नहीं है। उनके मुताबिक, केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश में देर सवेर विधानसभा के गठन के साथ ही मुख्यमंत्री भी होगा। उस स्थिति में एसएसजी जैसे संगठन की दोबारा जरुरत होगी। इसलिए वह चाहते हैं कि इसे पूरी तरह भंग करने के बजाय इसके अधिकारियों व जवानों की संख्या को न्यूनतम स्तर पर लाया जाए।

एसएसजी को भंग किए जाने के साथ ही जम्मू कश्मीर चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों डा फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, गु़लाम नबी आजाद और महबूबा मुफ्ती व उनके स्वजनों को प्राप्त इसका सुरक्षा क्वच भी हट जाएगा। अलबत्ता, जब तक इसे पूरी तरह भंग नहीं किया जाता, चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों को इसका सुरक्षा क्वच सीमित आधार पर उपलब्ध रहेगा,लेकिन उनके स्वजन इससे पूरी तरह वंचित रहेंगे। उन्होंने बताया कि चारों मुख्यमंत्री जैड प्लस श्रेणी के सुरक्षा क्वच के अधिकारी हैं और उन्हें संबधित सुरक्षा मानदंडों के मुताबिक यह सुविधा पहले की तरह उपलब्ध रहेगी। पूर्व मुख्यमंत्री डा फारुक अब्दुल्ला के साथ एनएसजी के कमांडो हमेश तैनात रहते हैं।

गुलाम नबी आजाद श्रीनगर में नहीं रहते और वह अधिकांश समय दिल्ली में ही रहते हैं,इसलिए उन्हें दिल्ली के सुरक्षा परिदृश्य के आधार पर सुरक्षा क्चच प्रदान किया जाएगा। वह जब कभी जम्मू कश्मीर आएंगे तो उनहें तत्कालीन परिस्थितियों के आधार पर सुरक्षा कवच जम्मू कश्मीर पुलिस प्रदान करेगी। इसके अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस के अंतर्गत जिला पुलिस और जम्मू कश्मीर पुलिस का सुरक्षा विंग इन सभी नेताओं व इनके स्वजनों की सुरक्षा का लगातार आकलन करते हुए सुरक्षा क्वच तैयार करेगी।उन्होंने बताया कि एसएसजी में तैनात सभी पुलिस अधिकारियों व जवानाें को उनके मूल विंग में वापस भेजा जाएगा। इनमें से अधिकांश को जम्मू कश्मीर पुलिस के सिक्योरिटी विंग और उपराज्यपाल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली एसएसएफ में भेजा जाएगा।

सिक्योरिटी विंग मेंं जम्मू कश्मीर पुलिस ने संगठन ने बीते माह ही विस्तार किया है। उसमें दो वाहिनियों को और शामिल किया गया है। एसएसजी के पास जो सुरक्षाउपकरण और हथियार हैं, उन्हें सुरक्षा विंग व एसएसएफ को सौंपा जाएगा। एसएसफ का गठन वर्ष 2018 में तत्कालीन उपराज्यपाल एनएन वोहरा के नेतृत्व में प्रदेश प्रशासनिक परिषद ने एक बैठक में लिया था।एसएसएफ का गठन राज्यपाल की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए किया गया था।

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