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शताब्दीपुरम योजना में प्लाट आरक्षण से जीडीए को आठ करोड़ का नुकसान

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ग्वालियर। शताब्दीपुरम योजना में जिस जमीन के आरक्षण की स्वीकृति को निरस्त कराने के लिए दूसरी फाइल तैयार करने पर अतिरिक्त ड्राफ्टमैन भास्कर राव काले को निलंबित किया गया है, उसी जमीन के आरक्षण से ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) को आठ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जीडीए के अधिकारियों ने 9500 रुपये प्रति वर्गमीटर कलेक्टर गाइडलाइन की जमीन लेकर कंपनी को 24 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर कीमत की जमीन आरक्षित कर दी है।

इस मामले की शिकायत जीडीए के पूर्व उपाध्यक्ष गोपीलाल भारतीय ने नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह से की है। इसमें जीडीए सीईओ प्रदीप शर्मा पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है, जबकि सीईओ का कहना है कि ये पूरी प्रक्रिया बोर्ड से पूर्व में ही स्वीकृत हो गई थी। उन्होंने सिर्फ प्रक्रिया का पालन करते हुए भूखंड आरक्षण का आदेश जारी किया है। शताब्दीपुरम योजना के तहत मैसर्स श्रीराम रियल इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा ग्राम विक्रमपुर की भूमि सर्वे क्रमांक 354/2, 28/3, 354/5, 323/23, 318, 354/3, 386/1, 382, 338/2, 338/1, 338/2, 340, 345, 346 व 348 की लगभग 11 बीघा भूमि 26 प्रतिशत प्लाट देने के अनुबंध के बाद जीडीए को दी गई थी। वर्तमान सीईओ प्रदीप शर्मा ने गत 15 दिसंबर को फर्म को शताब्दीपुरम फेस-4 के ए-ब्लाक में 11X18 साइज के 5544 वर्गमीटर वाले 28 व्यवसायिक भूखंड आरक्षित किए हैं। जीडीए के पूर्व उपाध्यक्ष द्वारा की गई शिकायत में उल्लेख किया गया है कि आवंटित व्यवसायिक भूखंडों की प्रति वर्गमीटर कीमत लगभग 24000 रुपये है और सरेंडर की जमीन की कीमत लगभग 9500 रुपये प्रतिवर्ग मीटर है। इसके अलावा जीडीए में सरेंडर की गई जमीन में ही भूमि स्वामी को 26 प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटन का नियम है, लेकिन आरोप लगाया गया है कि जीडीए सीईओ ने नियमों की अनदेखी कर शताब्दीपुरम फेज-4 में 28 भूखंड आरक्षित कर दिए हैं। नियमानुसार अधिग्रहित की गई जमीन से 500 मीटर की दूरी पर ही भूखंड दिए जा सकते हैं, लेकिन इससे ज्यादा दूरी पर भूखंड दे दिए गए हैं। इसके लिए जीडीए बोर्ड से भी अनुमति नहीं ली गई है। इसके अलावा शताब्दीपुरम फेज-4 योजना में पुलिस के लिए चिह्नित की गई दो हैक्टेयर भूमि भी इसी फर्म को दे दी गई है।

जीडीए के सीईओ ने सस्ती कीमत वाली जमीन लेकर महंगी कीमत की जमीन आरक्षित की है। इससे जीडीए को आठ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मैंने इसकी शिकायत नगरीय विकास मंत्री से की है, ताकि मामले की जांच हो सके। गोपीलाल भारतीय, पूर्व उपाध्यक्ष जीडीए पहले से स्वीकृति थी मैंने सिर्फ आदेश ही जारी किया है, जबकि ये सारी स्वीकृति तो बोर्ड की बैठक से लेकर तत्कालीन सीईओ और संभागीय आयुक्त द्वारा दी गई थी। मैंने उन्हीं के पालन में यह आदेश जारी किया है। इस मामले में भूखंड आरक्षित किए गए हैं। अभी आवंटन नहीं किया गया है।

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