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ग्वालियर में कई ऐतिहासिक पर्यटन स्थल फिर भी नहीं दिख रहे विदेशी मेहमान

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ग्वालियर। ग्वालियर शहर हमेशा से अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता रहा है। एक से बढ़कर एक लुभावने, प्राचीन और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल हमारे शहर में मौजूद हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि इस सब के बावजूद शहर को उतना पर्यटन नहीं मिल रहा है जितना मिलना चाहिए। कोरोना काल के बाद से स्थिति और खराब हुई है। स्वदेशी पर्यटक फिर भी घूमने फिरने आ जाते हैं लेकिन विदेशी पर्यटक ग्वालियर घूमने में कोई विशेष रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके पीछे के कारण की बात करें तो लाइसेंस धारक ट्रेवल एजेंसी और टूरिस्ट गाइड की कमी, लोकल ट्रांसपोर्ट की कमी के साथ इन दर्शनीय स्थलों के रखरखाव के प्रति नगर प्रशासन की सतर्कता की कमी घटते विदेशी पर्यटन का सबसे बड़ा कारण है। टूरिस्ट गाइड की कमी : प्राचीन धरोहरों को घूमने के साथ उनके बारे में सटीक जानकारी होना जरूरी होता है। ऐसे में शहर के पास लाइसेंस धारक टूरिस्ट गाइड के नाम पर सिर्फ नौ लोग हैं। जिसमें एक गाइड़ मिनिस्ट्री आफ टूरिज्म से मान्यता प्राप्त है और शेष आठ को मप्र टूरिज्म से मान्यता मिली है। शहर के पर्यटन के लिहाज से गाइड़ का यह आंकड़ा बेहद कम है। हालांकि इसका फायदा वह अमान्य टूरिस्ट गाइड उठा लेते हैं और पर्यटकों को गलत जानकारी के देते हुए शहर घुमाते हैं।

ग्वालियर किले पर लंबे समय से बंद पड़ा है लाइट एंड साउंड शो ग्वालियर किले पर लाइट एंड साउंड शो होता था। जो एक साल से बंद पड़ा है। इसी तरह सूर्य मंदिर छह माह, सरोद घर चार माह से बंद है। इधर कटोराताल लाइट शो नियमित नहीं चलता। इन स्थलों का आनंद सैलानी नहीं उठा पाते हैं। आपको बता दें कि शहर के पर्यटन स्थनों में ग्वालियर किला एक बड़ा नाम है। इसी तरह जयविलास पैलेस, गौस मोहम्मद का मकबरा और सूर्य मंदिर सहित कई स्थल हैं जो लोगों की पसंद बनते रहे हैं।

व्यवस्थाओं में परिवर्तन कर इसे और बेहतर बनाया जा सकता है अभी तक शहर किसी पर्यटक के मन में पर्यटन विकल्प के रूप में जगह नहीं बना पाया है, वहीं अंतराष्ट्रीय पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए कुछ व्यवस्थाओं में परिवर्तन कर इसे और बेहतर बनाया जा सकता है। जिसमें टूरिस्ट गाइड की संख्या में इजाफा होना जरूरी है।

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