देश के सेंट्रल बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2027 की अपनी पॉलिसी रेट का ऐलान कर दिया. आरबीआई ने लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. जिसके बाद आरबीआई का रेपो रेट 5.25 फीसदी पर ही रहेगा. इससे पहले आरबीआई ने दिसंबर के महीने में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी. वो भी ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतों की वजह से देश में महंगाई में इजाफा देखने को मिला है. वैसे पॉलिसी रेट के ऐलान से पहले ट्रंप ने दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान कर दिया.
साथ ही ईरान ने भी होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए अपनी सहमति जता दी. जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में 19 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और अमेरिकी क्रूड के दाम 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए. जानकारों की मानें तो कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है. जिसका असर देश के शेयर बाजार में भी देखने को मिला और सेंसेक्स में 2700 से ज्यादा अंकों की तेजी देखने को मिली. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर पॉलिसी रेट पर आरबीआई की ओर से किस तरह का बयान आया है.
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं
देश के सेंट्रल बैंक लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव ना करते हुए 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा है. इससे पहले दिसंबर के महीने में आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी. इसका मतलब है कि साल 2025 में रेपो रेट में 1.25 फीसदी की कटौती की थी. कटौती से पहले आरबीआई रेपो रेट को 6.50 फीसदी पर लेकर आया था. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के पदभार संभालने के बाद फरवरी 2025 में पहली बार रेपो रेट में कटौती देखने को मिली थी. जानकारों की मानें तो आने वाली पॉलिसी रेट में भी पॉज बटन दबा रह सकता है. वहीं दूसरी ओर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने SDF 5 फीसदी पर और MSF दर को 5.5 फीसदी पर बरकरार रखने की घोषणा की.
बढ़ सकती है महंगाई
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी रेट के ऐलान के बाद कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आयातित महंगाई बढ़ा सकती हैं और चालू खाता घाटा (CAD) चौड़ा कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि वैश्विक विकास की कमजोर संभावनाएं बाहरी मांग को धीमा कर सकती हैं और रेमिटेंस के प्रवाह को कम कर सकती हैं. संजय मल्होत्रा ने कहा कि कि फरवरी तक के हाई-फ़्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स आर्थिक गतिविधियों में लगातार मजबूत गति की ओर इशारा करते हैं. गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि ग्रोथ की गति को मजबूत निजी खपत और लगातार निवेश की मांग से समर्थन मिल रहा है. गवर्नर मल्होत्रा का कहना है कि MPC ने यह नोट किया कि संघर्ष की तीव्रता और अवधि, साथ ही ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचे को होने वाले संभावित नुकसान से, महंगाई और ग्रोथ दोनों के लिए जोखिम पैदा होता है.
जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
आरबीआई ने अपने ग्रोथ अनुमान में कमी की है. आरबीआई गवर्नर के अनुसार पहली तिमाही में देश की ग्रोथ 6.8 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.7 फीसदी और तीसरी तिमाही में 7 फीसदी और चौथी तिमाही में 7.2 फीसदी का अनुमान लगाया गया है. वैसे वित्त वर्ष 2027 में देश में ग्रोथ का अनुमान 6.9 फीसदी लगाया गया है. पिछली पॉलिसी पॉलिसी मीटिंग में पहली तिमाही का अनुमान 6.9 फीसदी, दूसरी तिमाही में 7 फीसदी का अनुमान लगाया था.
कितनी रह सकती है महंगाई
अगर बात कमहंगाई की करें तो आरबीआई ने महंगाई के अनुमान में भी इजाफा किया है. वित्त वर्ष 2026 में महंगाई अनुमान को दोगुना बढ़ाकर 2.1 फीसदी से 4.6 फीसदी कर दिया है. जबकि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के महंगाई अनुमान को बढ़ाकर 4.7 फीसदी कर दिया है, जो पहले 0.6 फीसदी था. जबकि चौथी तिमाही के महंगाई का अनुमान 5.2 फीसदी किया गया है, जो पहले 3.2 फीसदी देखने को मिला था. अगर बात मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिहामी की बात करें तो महंगाई अनुमान को 4 फीसदी से बढ़कर 4.4 फीसदी कर दिया गया है. जबकि दूसरी तिमाही महंगाई अनुमान को कम कर 4 फीसदी किया गया है, जो पहले 4.2 फीसदी था. वित्त वर्ष 2027 में कुल महंगाई 4.7 फीसदी रह सकती है. वहीं कोर इंफ्लेशन 4.4 फीसदी रह सकता है.
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