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अमेरिका और ईरान के बीच निकट भविष्‍य में नहीं सुधरने वाले हैं संबंध, बाइडन ने लिया बड़ा फैसला

नई दिल्‍ली। अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने ईरान पर फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि जब तक ईरान 2015 में हुए परमाणु समझौते के तहत किए गए वादे पूरा नहीं करता है तब तक उस पर से प्रतिबंध भी नहीं हटाए जाएंगे। उनका ये बयान इसलिए काफी खास है क्‍योंकि अपने चुनावी कार्यक्रमों में उन्‍होंने ईरान से परमाणु संधि दोबारा शुरू करने की मंशा जताई थी। लेकिन अब इस बयान के बाद इस मुद्दे पर उनका रुख काफी स्‍पष्‍ट हो गया है। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले ईरान की तरफ से बाइडन को इस संधि पर वापस लौटने के बारे में खुद अयातुल्‍लाह खमेनेई ने कहा था।उनका कहना था कि यदि वो चाहते हैं कि ईरान संधि में शामिल हो तो इसके लिए उन्‍हें ईरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटाने होंगे। ऐसा होने पर ईरान अपने किए सभी वादों को पूरा करेगा।

बाइडन का रुख स्‍पष्‍ट

इसके ही जवाब में राष्‍ट्रपति बाइडन से जब एक टीवी इंटरव्‍यू के दौरान अपना रुख स्‍पष्‍ट करने के बारे में कहा गया तो उन्‍होंने कहा कि वो एकतरफा प्रतिबंधों को हटाने का फैसला किसी भी सूरत से नहीं लेंगे। इसके लिए पहले ईरान को अपने किए गए सभी वादों को पूरा करना होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्‍या वो ईरान के साथ बातचीत की मेज पर बैठना चाहेंगे, तो इसके जवाब में उन्‍होंने तुरंत ‘ना’ कह दिया। ऐसे में दोनों देशों के बीच रिश्‍तों के निकट भविष्‍य में सुधरने की उम्‍मीद लगभग खत्‍म हो गई है। जवाहरलाल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बीआर दीपक का कहना है कि इससे दोनों के बीच तय मुद्दों पर तनाव कायम रहेगा। उनके ईरान की मंशा इस पूरे क्षेत्र में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दूसरे राष्‍ट्रों को अपने प्रभुत्‍व में लेने की है। लिहाजा, संधि के लिए किसी एक को अपना रुख छोड़ते हुए आगे आना ही होगा। 

2015 में हुई थी न्‍यूक्लियर डील

आपको बता दें कि जिस परमाणु संधि की बात बाइडन और ईरान की तरफ से की गई वह वर्ष 2015 में बराक ओबामा प्रशासन के दौरान की गई थी। इस डील को ओबामा ने अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया था। वहीं जब डोनाल्‍ड ट्रंप ने अमेरिका की सत्‍ता हाथों में ली तो उन्‍होंने न सिर्फ इस समझौते से अमेरिका को बाहर निकाल लिया बल्कि ये तक कहा कि ये राष्‍ट्रपति ओबामा की सबसे बड़ी गलती थी। उनका कहना था कि इस समझौते से अमेरिका को नुकसान के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। उन्‍होंने ईरान के साथ अमेरिका के हित में दोबारा परमाणु समझौता करने की भी बात कई बार अंतरराष्‍ट्रीय और राष्‍ट्रीय मंच पर कही थी। बाइडन के सत्‍ता में आने के बाद माना जा रहा था कि शायद वो इस डील को दोबारा शुरू करने की पहल करेंगे। लेकिन उनके बयान से अब ऐसा नहीं लगता है।Playvolume00:49/02:02Truvid

डील में ये देश भी थे शामिल 

अमेरिका ने अपने बयान में जिन प्रतिबंधों को न हटाने की बात कही है उनमें पूर्व राष्‍ट्रपति ट्रंप द्वारा वर्ष 2018 में लगाए गए सभी प्रतिबंध भी शामिल हैं। ईरान के साथ हुए इस परमाणु समझौते पर अमेरिका और ईरान समेत ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और जर्मनी ने भी हस्‍ताक्षर किए थे। इस डील से अमेरिका और बाद में ईरान के खुद को अलग करने के बाद दोनों देशों में लगातार तनाव बढ़ा है। इसके बाद से ईरान ने न सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम को नए सिरे से आगे बढ़ाने बल्कि यूरेनियम संवर्धन को 20 फीसद तक करना शुरू कर दिया है, जबकि समझौते

में इसके लिए केवल 3.76 फीसद ही तय की गई थी।

यमन को लेकर बाइडन का फैसला 

आपको यहां पर ये भी बता दें कि ईरान के सर्वोच्‍च नेता का बयान ऐसे समय में आया था जब बाइडन ने यमन में चल रहे गृह युद्ध में सऊदी अरब का समर्थन करना बंद करने का फैसला लिया था। इसके बाद उनके विशेष दूत ने तेहरान का दौरा भी किया था। बाइडन ने यमन में चलने वाले इस युद्ध को मानवता के खिलाफ सबसे बड़ी त्रासदी बताया था। इसके अलावा उन्‍होंने बड़ा फैसला लेते हुए सऊदी अरब समेत यूएई से डोनाल्‍ड ट्रंप के कार्यकाल में हुआ हथियारों का सौदा भी फिलहाल सस्‍पेंड करने का फैसला लिया है।

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