नई दिल्ली: सफदरजंग अस्पताल ने शनिवार को बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) लंबे समय तक उपवास और डिहाइड्रेशन के कारण कमजोर हो गए हैं, लेकिन फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। दिल्ली पुलिस ने मेडिकल सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के निर्देशों का हवाला देते हुए, जंतर-मंतर पर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें शनिवार सुबह सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया।
अस्पताल ने जारी किया बयान, लगातार निगरानी की जरूरत
अस्पताल ने वांगचुक की सेहत को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है, “सोनम वांगचुक लंबे समय तक उपवास और डिहाइड्रेशन के कारण काफी कमजोर हो गए हैं। हालांकि अभी उनकी हालत स्थिर बनी हुई है, लेकिन उनके शरीर के पैरामीटर्स को पूरी तरह से सामान्य करने के लिए लगातार निगरानी और इलाज की जरूरत है।” बयान के अनुसार, वांगचुक को शनिवार सुबह 7:40 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
NEET विवाद को लेकर 28 जून से अनशन पर थे वांगचुक
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। वे मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) में कथित अनियमितताओं और इस विवाद के कारण कथित तौर पर हुई छात्रों की मौतों को लेकर ‘कॉजपा’ (CJP) के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन का मजबूती से समर्थन कर रहे हैं।
21 दिन की भूख हड़ताल में कम हुआ 9.5 किलो वजन
पिछले तीन हफ्तों के कठिन अनशन के चलते उनकी सेहत में लगातार गिरावट आ रही थी। शुक्रवार को डॉक्टरों ने बताया था कि भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से वांगचुक का वजन लगभग 9.5 किलोग्राम कम हो गया है। इसके अलावा, अस्पताल में उनके ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) और ब्लड शुगर लेवल की भी कड़ी निगरानी की जा रही है। शुक्रवार रात वांगचुक ने खुद कहा था कि खराब होती हालत के बावजूद वे अपना उपवास जारी रखने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने दावा किया था कि इस लंबी भूख हड़ताल के दौरान उनके शरीर का लगभग “20 प्रतिशत वजन” कम हो गया है।
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