नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची कलह अब अपने चरम पर है। पार्टी की संसदीय दल में फूट के संकेत स्पष्ट हैं और अब वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय के बागी नेताओं के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है।
🚗 दिल्ली में बागी सांसदों की सक्रियता
शनिवार को कोलकाता से दिल्ली पहुंचने के बाद सुदीप बंद्योपाध्याय, बागी सांसद शताब्दी रॉय के साथ एक ही कार में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे। काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में यह बागी खेमा लगातार सक्रिय है और दावा कर रहा है कि उन्हें करीब 20 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। सूत्र बताते हैं कि सोमवार को ये सांसद लोकसभा स्पीकर से मिलकर अलग गुट बनाने की औपचारिक मांग कर सकते हैं।
👤 सुदीप बंद्योपाध्याय की भूमिका और नाराजगी
सुदीप बंद्योपाध्याय लोकसभा में टीएमसी के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक रहे हैं। हाल ही में उन्हें पार्टी के लोकसभा नेता के पद से हटाकर अभिषेक बनर्जी को यह जिम्मेदारी दिए जाने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वे पार्टी आलाकमान से नाराज चल रहे हैं। यदि वे आधिकारिक तौर पर बागी खेमे में शामिल होते हैं, तो उन्हें इस नए गुट का नेता बनाया जा सकता है, जो ममता बनर्जी की पकड़ को और कमजोर कर देगा।
⚖️ ममता बनर्जी के लिए ‘डबल झटका’ की आशंका
सुदीप बंद्योपाध्याय का पार्टी से जाना ममता बनर्जी के लिए भावनात्मक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा नुकसान है। सुदीप के साथ उनकी पत्नी नयना बंद्योपाध्याय भी राजनीति में सक्रिय हैं और उन्हें ममता ने हाल ही में डिप्टी लीडर का पद भी दिया था। अगर सुदीप पार्टी छोड़ते हैं, तो नयना का भी साथ छोड़ना तय माना जा रहा है, जिससे टीएमसी को ‘डबल झटका’ लगना निश्चित है।
⏳ आगे क्या होगा?
रविवार को दिल्ली में बागी सांसदों की एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें शुभेंदु अधिकारी की उपस्थिति की भी चर्चा है। पार्टी के भीतर असंतोष का यह बढ़ता दायरा ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है, जिसे संभालना अब उनके लिए आसान नहीं होगा।
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