SMTV India
Local & National Breaking News

Vishwakarma Puja 2022: इस बार विश्वकर्मा पूजा पर बन रहे हैं 5 शुभ संयोग, जानिए पूजन विधि

Vishwakarma Puja 2022: विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाता है और धर्म शास्त्रों के मुताबिक सृष्टि की रचना के बाद इसे संवारने का काम इन्होंने ही किया था.

18

Vishwakarma Puja 2022: विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाता है और धर्म शास्त्रों के मुताबिक सृष्टि की रचना के बाद इसे संवारने का काम इन्होंने ही किया था.

Vishwakarma Puja 2022: हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक सृष्टि की रचना भगवान ब्रह्मा ने की थी लेकिन इसे सजाने-संवारने का काम भगवान विश्वकर्मा ने किया. भगवान विश्वकर्मा को ही दुनिया का पहला और सबसे बड़ा इंजीनियर कहा जाता है. इसलिए हर साल कन्या संक्रांति के दिन विधि-विधान के साथ विश्वकर्मा पूजा होती है. (Vishwakarma Puja 2022 Date and Timing) विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों का उपयोग नहीं किया जाता और उनका पूजन किया जाता है. आइए जानते हैं कब है विश्वकर्मा पूजा और शुभ संयोग

विश्वकर्मा पूजा 2022 शुभ मुहूर्त

कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा की जाती है और जब सूर्य कन्या राशि में गोचर करते हैं तो उसे कन्या संक्रांति कहा जाता है. इस साल कन्या संक्रांति 17 सितंबर को है और इस दिन विश्वकर्मा पूजा की जाएगी. विश्वकर्मा पूजा के दिन 5 शुभ संयोग बन रहे हैं जिनमें पूजा करना अधिक फलदायी होता है.

विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह से रात तक वृद्धि योग रहेगा. इसके बाद द्विपुष्कर योग बनेगा और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह दोनों ही योग बेहद खास हैं. इस योगों में पूजा करने से जातक को शुभ फल प्राप्त होते हैं. इस दिन मशीनों की पूजा की जाती है और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 35 मिनट से लेकर 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दोपहर में 1 बजकर 45 मिनट से दोपहर 3 बजकर 20 मिनट तक शुभ मुहूर्त है. फिर दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 53 मिनट तक पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा.

विश्वकर्मा पूजा की विधि

विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों व औजारों को आराम दिया जाता है और इस दिन उनका इस्तेमाल नहीं होता. इस दिन मशीनों की पूजा की जाती है. विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद मंदिर स्वच्छ करें और एक चैकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. चैकी पर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित करें और हल्दी, अक्षत, फूल अर्पित करें. इसके बाद धूप-दीप दिखएं और मिठाई का भोग लगाएं. फिर आरती करें और प्रसाद सभी को बांट दें.

SMTV India