रांची: देश के 10 श्रेष्ठ सदर अस्पतालों में रांची सदर अस्पताल की गिनती होती है. इस अस्पताल के नाम कई उपलब्धियां भी हैं. इन सबके बीच एक सच्चाई यह है कि इस अस्पताल का हिमेटोलॉजी विभाग चिकित्सक, नर्स और जरूरी जांच संसाधनों की घोर कमी से जूझ रहा है. यह स्थिति तब है, जब आयुष्मान भारत योजना के तहत यह विभाग मरीजों के इलाज के एवज में मिलने वाले इंसेंटिव की करीब 10 करोड़ रुपये हर वर्ष कमाई कर के सदर अस्पताल को देता है.
चिकित्सक और जांच की सुविधा बढ़ाने का आग्रह
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रांची सदर अस्पताल के हिमेटोलॉजी यानी ब्लड डिओर्डर से जुड़ी बीमारियों के विभाग को अकेले अपने दम पर चला रहे डॉ. अभिषेक रंजन ने कहा कि यह सच है कि विभाग में मेडिकल अफसर बढ़ाने के लिए कई बार सिविल सर्जन और सदर अस्पताल के उपाधीक्षक को लिखा गया है, लेकिन अभी तक उन्हें हैंड्स नहीं मिल पाया है. ऐसे में जब उन्हें किसी मेडिकल सेमिनार में भाग लेने रांची से बाहर जाना होता है या कभी अवकाश पर जाना होता है तो इंडोर में भर्ती मरीजों के इलाज की चिंता उन्हें सताती है. कई बार तो खुद छुट्टी जाने से पहले वह मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे देते हैं.
35-40 ब्लड कैंसर के मरीज रहते हैं भर्ती
सदर अस्पताल के हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन कहते हैं कि उनके विभाग में 35-40 ब्लड कैंसर और अप्लास्टिक एनेमिया के और इतने ही करीब मरीज थैलेसीमिया और सिकल सेल एनेमिया के भर्ती रहते हैं. ऐसे में एक चिकित्सक के भरोसे पूरा विभाग छोड़ देना और मरीज देखने, इलाज से लेकर डिस्चार्ज समरी तक एक डॉक्टर द्वारा करना संभव नहीं है. यह बहुत दिन नहीं चल सकता.
आयुष्मान योजना में जांच भी हो शामिलः डॉ. अभिषेक
सदर अस्पताल रांची के हिमेटोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक अभिषेक रंजन कहते हैं कि डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ और जरूरी जांच की व्यवस्था जरूरी है. उन्होंने कहा कि अब तो सदर अस्पताल में हम बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसे में एक चिकित्सक के भरोसे जरूरतमंद मरीजों का इलाज कैसे संभव है. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में ब्लड कैंसर के मरीजों की 20 से 30 हजार रुपये तक के जांच झारखंड में निजी या सरकारी संस्थानों में नहीं होती है. ऐसे में हमें आउटसोर्स में सैंपल को बाहर भेजना पड़ता है. जरूरत है कि आयुष्मान भारत के पैकेज में ही इन जांच को शामिल किया जाए.
जल्द हिमेटोलॉजी विभाग की समस्या दूर होगी-उपाधीक्षक
रांची सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने माना कि हिमेटोलॉजी विभाग की समस्याओं को दूर करने में थोड़ा वक्त लगा है, लेकिन अब व्यवस्था में सुधार होगा. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल के हिमेटोलॉजी विभाग में 02 हिमेटोलॉजिस्ट, 01 पीडिया ऑन्कोलॉजिस्ट और 06 शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने कहा कि सोमवार से सदर अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी के हर फ्लोर के लिए एक डॉक्टर (05 फ्लोर के लिए 05 डॉक्टर) की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मरीजों के इलाज में कोई परेशानी न हो.



झारखण्ड










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