नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए FASTag का सालाना पास तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. 15 अगस्त 2025 को शुरू हुए इस पास को महज छह महीने में ही 50 लाख से ज्यादा लोगों ने अपना लिया है. इस अवधि में FASTag सालाना पास से 26.55 करोड़ से अधिक टोल ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए हैं.
आंकड़ों के मुताबिक अब नेशनल हाईवे नेटवर्क पर होने वाले कुल कार ट्रांजैक्शन में करीब 28 फीसदी हिस्सेदारी FASTag सालाना पास की है. यानी हर चार में से एक कार इस सुविधा का इस्तेमाल कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि FASTag सालाना पास से टोल पर रुकने की परेशानी कम हुई है और लोगों को किफायती व सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिला है. यही वजह है कि हाईवे यात्रियों के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
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राज्यवार आंकड़ों में चंडीगढ़ सबसे आगे
दिल्ली-एनसीआर के बिजवासन टोल प्लाजा पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है, जहां करीब 57 फीसदी कारें सालाना पास के जरिए गुजर रही हैं. इसके बाद मुंडका टोल प्लाजा (दिल्ली-एनसीआर) और झिंझोली टोल प्लाजा (सोनीपत) हैं, जहां करीब 53 फीसदी गैर-व्यावसायिक वाहन इस पास का उपयोग कर रहे हैं. राज्यवार आंकड़ों में चंडीगढ़ सबसे आगे है, जहां देशभर के कुल सालाना पास ट्रांजैक्शन में 14 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके बाद तमिलनाडु 12.3 फीसदी और दिल्ली 11.5 फीसदी के साथ अगले स्थान पर हैं.
FASTag सालाना पास देश के 1,150 टोल प्लाजा पर लागू
FASTag सालाना पास करीब 1,150 टोल प्लाजा पर लागू है. इसे एक बार ₹3,000 का भुगतान कर एक साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक इस्तेमाल किया जा सकता है. यह सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए मान्य है और Rajmargyatra ऐप या NHAI की वेबसाइट से भुगतान करने पर दो घंटे के भीतर मौजूदा FASTag पर एक्टिव हो जाता है. इसके बाद आसानी से नेशनल हाइवे पर बिना रुके यात्रा शुरू हो जाती है.
हर महीने बदलने वाले टोल खर्च से मिली निजात
सरकार का कहना है कि वार्षिक पास ने हर महीने बदलने वाले टोल खर्च को तय और आसान बना दिया है. इससे रोज सफर करने वालों को पूरे साल पैसे की बचत, तय खर्च और बिना परेशानी यात्रा का फायदा मिल रहा है. अब उन्हें बार-बार फास्टैग रिचार्ज करने की चिंता भी नहीं रहती. यात्री बिना रुके अपना सफर पूरा कर रहे हैं.



दिल्ली/NCR









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