खंडवा | शिक्षा एवं सफलता समाचार
दादाजी और किशोर कुमार की नगरी खंडवा में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यदि इन प्रतिभाओं को सही दिशा मिले, तो वे अपने हुनर से देश-दुनिया में शहर का नाम रोशन कर सकती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा ही एक गौरवशाली मुकाम खंडवा की बेटी रूपल जायसवाल ने हासिल किया है।
समाजसेवी और प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि रूपल ने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर यूपीएससी (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा में देशभर में 43वां स्थान प्राप्त किया है। रूपल का सपना कलेक्टर बनकर देश और आम जनता की सेवा करना है।
✨ सफलता का सफर: हार न मानने की जिद और तीसरा प्रयास
रूपल के पिता धनंजय जायसवाल एक सिविल इंजीनियर हैं, जिन्होंने अपनी बेटी को ऊंची उड़ान देने के लिए दिन-रात मेहनत की। रूपल ने वर्ष 2023 में वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई में जॉब की, लेकिन वहां उन्हें सुकून नहीं मिला। तभी उन्होंने आईएएस (IAS) बनने का सपना देखा।
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पहला प्रयास (2023): रूपल पहली बार यूपीएससी परीक्षा में शामिल हुईं, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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दूसरा प्रयास (2024): हार न मानते हुए दोबारा परीक्षा दी और 512वां स्थान प्राप्त किया। लेकिन कलेक्टर बनने की चाहत में वे इस रैंक से संतुष्ट नहीं हुईं।
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तीसरा प्रयास (2025): तीसरी बार परीक्षा दी और अपनी जिद व 15 घंटे की सेल्फ स्टडी के दम पर 43वीं रैंक हासिल कर ली।
🎤 इंटरव्यू के रोचक पल: ‘किशोर कुमार का यह शहर कितना दीवाना है?’
रूपल ने बताया कि जब इंटरव्यू की बारी आई, तो उनसे खंडवा और दिग्गज गायक किशोर कुमार को लेकर काफी सवाल पूछे गए। बोर्ड ने पूछा कि “किशोर दा की नगरी में उनका क्या है?” और “यह शहर उनका कितना दीवाना है?” रूपल को गाने का काफी शौक है, ऐसे में जब संगीत से जुड़े प्रश्न पूछे गए, तो उन्हें आभास हो गया था कि उनका चयन पक्का है। उन्होंने गर्व से बताया कि किशोर दा ने खंडवा में जन्म लिया और देश में शहर का नाम रोशन किया, यहाँ उनका स्मारक एवं समाधि है।
📚 युवाओं के लिए रूपल का संदेश: “सेल्फ-स्टडी पर करें भरोसा”
बिना किसी कोचिंग के घर पर ही 15-15 घंटे पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल करने वाली रूपल का स्पष्ट कहना है कि ऑनलाइन कोचिंग के चक्कर में पड़ने के बजाय छात्रों को अपनी मेहनत पर भरोसा करना चाहिए। खुद की मेहनत ही उन्हें ऊंचे मुकाम तक पहुंचाएगी।
रूपल कलेक्टर बनकर आम जनता के दर्द का निवारण करना चाहती हैं, क्योंकि उन्होंने खंडवा में रहकर कई लोगों के सपनों को तिल-तिल मरते देखा है। जैसे ही उनकी सफलता की खबर परिजनों को मिली, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया गया। पूरे शहर और समाज में खुशी की लहर है।