खूंटीः खूंटी नगर पंचायत चुनाव भले ही कागजों पर गैर-दलीय हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. इस चुनाव ने अब स्थानीय निकाय की सीमाएं लांघते हुए राज्यस्तरीय राजनीतिक प्रतिष्ठा का रूप ले लिया है. भाजपा, कांग्रेस और झामुमो तीनों दलों ने अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों की जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे खूंटी सियासी अखाड़ा बन गया है.
त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है. कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार मनोनीत बोदरा, झामुमो समर्थित सोनम बागे और भाजपा समर्थित पूर्व नगर अध्यक्ष रानी टूटी मैदान में हैं. तीनों दल खुले तौर पर प्रचार में जुटे हैं, जिससे चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है. अध्यक्ष पद के साथ-साथ 19 वार्डों में पार्षद पद के लिए 77 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. नाम भले ही निर्दलीय हों, लेकिन वार्ड स्तर पर भी दलों की सक्रियता साफ दिखाई दे रही है.
बाबूलाल और अर्जुन मुंडा ने संभाला मोर्चा भाजपा ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है. पार्टी के लिए प्रचार की कमान राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा ने संभाली है. दोनों नेताओं ने मंच से भाजपा समर्थित उम्मीदवार रानी टूटी की जीत का दावा करते हुए कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर मैदान में उतरने की अपील की. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि खूंटी में जीत सिर्फ नगर पंचायत की नहीं, बल्कि झारखंड की दिशा तय करेगी. वहीं अर्जुन मुंडा ने भी संगठन को पूरी ताकत से जुटने का संदेश दिया. झामुमो विधायक और कांग्रेस सांसद भी प्रचार में उतरे वहीं झामुमो की ओर से विधायक राम सूर्य मुंडा ने पार्टी समर्थित उम्मीदवार सोनम बागे के पक्ष में मोर्चा संभाला है. उन्होंने सोनम बागे को शिक्षित बताते हुए अन्य दलों के उम्मीदवारों को सेवानिवृत्त करार दिया और विकास की दृष्टि से झामुमो को बेहतर विकल्प बताया. कांग्रेस भी हालिया राजनीतिक उत्साह के साथ चुनावी मैदान में सक्रिय है और अपने समर्थित उम्मीदवार की जीत को लेकर आश्वस्त दिख रही है. इस चुनाव में सांसद कालीचरण मुंडा की मौजूदगी ने भी मुकाबले को और महत्वपूर्ण बना दिया है. आम मतदाताओं के बीच यह चर्चा आम है कि अधिकांश प्रत्याशी किसी न किसी दल से जुड़े हैं, जिससे पार्षद चुनाव भी दलों की साख से जुड़ गया है. मुकाबला रोचक होने के आसार बता दें कि वर्ष 2018 में खूंटी नगर पंचायत चुनाव दलीय आधार पर हुए थे, जिसमें भाजपा ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर जीत दर्ज की थी. आठ साल बाद चुनाव का स्वरूप भले ही बदल गया हो, लेकिन राजनीतिक दलों की दखलअंदाजी पहले से कहीं ज्यादा नजर आ रही है. खास बात यह भी है कि इंडिया गठबंधन के घटक दल कांग्रेस और झामुमो अलग-अलग उम्मीदवारों को समर्थन दे रहे हैं, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है. अब सबकी निगाहें मतदाताओं के फैसले पर टिकी हैं. यह फैसला न सिर्फ खूंटी नगर पंचायत की कमान तय करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि गैर-दलीय कहे जाने वाले चुनावों में आखिर किस दल की राजनीतिक पकड़ सबसे मजबूत है.



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