इंदौर: देश में वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा की जो व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए निर्धारित है. ठीक उसी स्तर की सुरक्षा दायरे में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी रहते हैं. मोहन भागवत देश में ऐसे पहले वीआईपी हैं, जिसे जेड प्लस सिक्योरिटी के साथ एडवांस सिक्योरिटी लाइन का प्रोटेक्शन सेटअप दिया गया है. बुधवार यानि आज मोहन भागवत खरगौन दौरे पर हैं. जहां वे कसरावद में आयोजित विचार प्रेरक कार्यक्रम में शामिल होंगे.
मल्टीलेवल घेरे में इंदौर पहुंचे मोहन भागवत
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नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय से मोहन भागवत वंदे भारत ट्रेन से इंदौर पहुंचे. यहां रेलवे स्टेशन पर ही मोहन भागवत जेड प्लस सुरक्षा में नजर आए. इसके अलावा उन्हें प्रधानमंत्री को दी जाने वाली एडवांस सिक्योरिटी लाइन (ASL) सिक्योरिटी के तहत उनके चारों ओर बने मल्टीलेवल घेरे में करीब 58 कमांडो मौजूद थे. इसके अलावा इंदौर में जीआरपी और स्थानीय पुलिस की टीमों को पहले से ही रेलवे स्टेशन के आसपास तैनात किया गया था.
प्लेटफॉर्म-1 कॉरिडोर को कराया खाली मोहन भागवत के इंदौर आगमन के पहले ही रेलवे स्टेशन की पार्किंग को पहले से ही पूरी तरह से हटा दिया गया. इसके अलावा उनके आगमन से पहले स्टेशन क्रमांक 1 के पूरे कॉरिडोर को भी सुरक्षा के लिहाज से खाली करना पड़ा. इसके बाद मोहन भागवत को इलेक्ट्रिक व्हीकल (e-cart) से कार तक लाया गया. जिसके चारों और एनएसजी कमांडो अत्यधिक सिक्योरिटी आर्म और डिवाइस के साथ मौजूद थे. इसके बाद वह तमाम तरह के स्क्वायड और सिक्योरिटी सिस्टम के बीच यहां से कसरावद की ओर रवाना हो गए. इंदौर में रेलवे स्टेशन पर इस बार इसलिए भी भागवत के लिए तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई, क्योंकि पिछले साल 6 अप्रैल को रेलवे स्टेशन पर मोहन भागवत के सुरक्षा घेरे में अचानक एक बुलेट सवार घुस गया था. जिसकी बुलेट में मोडिफाइड साइलेंसर लगा था. पुलिस भी सकते में आ गई थी. हालांकि बाद में जांच के दौरान बाइक सवार युवक के पास कोई भी ऐसी आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली. इस बीच 2024 से ही इंटेलिजेंस ब्यूरो के अलर्ट के बाद मोहन भागवत की सुरक्षा में जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा के अलावा एडवांस सिक्योरिटी लाइन का मल्टीलेवल प्रोटेक्शन दिया गया है. ऐसे जानिए भागवत की सुरक्षा व्यवस्था ASL के सबसे सुरक्षित प्रोटोकॉल के तहत मोहन भागवत जहां भी जाते हैं, उसके पहले वहां सीआईएसएफ की एक एडवांस टीम आयोजन के वेन्यू पर तमाम सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल करती है. इसके अलावा वहां उनका प्रोग्राम क्या रहेगा? इसे लेकर भी स्थानीय प्रशासन से इस स्पेशल टीम की मीटिंग होती है. इसके अलावा उनका एंट्री और एग्जिट प्वाइंट क्या होगा, कितना सुरक्षित होगा? वह कार्यक्रम में कितनी देर रहेंगे, संभावित रूप से कहां और जा सकते हैं. इस सब को लेकर पड़ताल के बाद ही यात्रा को अंतिम रूप दिया जाता है. इसके अलावा जेड प्लस कैटेगरी के तहत मोहन भागवत के आसपास न्यूनतम 36 सुरक्षाकर्मी उनके मूवमेंट के दौरान साथ में होते हैं. इसमें एनएसजी के 10 कमांडो भी मौजूद रहते हैं. जो भागवत को एक मजबूत सुरक्षा घेरा प्रदान करते हैं. इन कमांडों के पास सुरक्षा के लिहाज से अत्यधुनिक गैजेट और डिवाइस होते हैं. इसके अलावा उनके चारों ओर एसपीजी के अधिकारी होते हैं और सीआरपीएफ के अलावा आइटीबीपी की एक अन्य टीम भी इन्हें सुरक्षा के लिहाज से कर करके चलती है.



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