खंडवा | सामाजिक सरोकार एवं प्रेरणादायक समाचार
शहर की वारको सिटी में आयोजित ‘नानी बाई के मायरे’ की कथा में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक क्षण आया, जिसने पूरे धार्मिक वातावरण को मानव सेवा के एक बड़े संकल्प में बदल दिया। कथा के दौरान ओंकार सिंह भिलाला ने मानवता की भलाई के लिए मरणोपरांत अपना ‘देहदान’ करने का ऐतिहासिक संकल्प लिया, जिसकी उपस्थित श्रद्धालुओं और समाजजनों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
✨ देहदान है मानवता का सबसे बड़ा और अमूल्य योगदान: पंडित नवल किशोरजी
कार्यक्रम में पधारे व्यासपीठ से पंडित नवल किशोरजी ने देहदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज को एक गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “समाज में लोग विभिन्न प्रकार के दान करते हैं— कोई धन का दान करता है, तो कोई वस्तुओं का। लेकिन ‘देहदान’ एक ऐसा महान दान है, जो मानवता के लिए सबसे बड़ा और अमूल्य योगदान माना जाता है।” उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे भी इस महान सेवा कार्य के लिए आगे आएं और देहदान व नेत्रदान के प्रति समाज में जागरूकता फैलाएं।
👁️ लायन्स क्लब और समिति की अनूठी पहल: अब तक 521 नेत्रदान
संयोजक नारायण बाहेती और समाजसेवी सुनील जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि ‘लायन्स नेत्रदान, देहदान एवं अंगदान जनजागृति समिति’ द्वारा भागवत कथा एवं अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों में मंच से देहदान की जानकारी देकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
लायन्स क्लब, सक्षम संस्था और समिति के संयुक्त सहयोग से:
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यह 168वां देहदान घोषणा पत्र भरा गया है।
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मरणोपरांत अब तक 22 देह मेडिकल कॉलेज को दान की जा चुकी हैं (जिससे मेडिकल छात्रों को रिसर्च में मदद मिलती है)।
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मरणोपरांत 521 व्यक्तियों के नेत्रदान सफलता पूर्वक करवाए गए हैं, जिन्होंने कई लोगों की अंधेरी दुनिया को रोशन किया है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने ओंकार सिंह भिलाला के इस साहसिक और प्रेरणादायक निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक आदर्श पहल बताया। निश्चित रूप से यह संकल्प समाज में मानव सेवा का एक नया संदेश फैलाने का कार्य करेगा।