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बिरगांव: औद्योगिक क्षेत्र बिरगांव, उरला, सरोरा और रावांभाठा के क्षेत्रों में इन दिनों कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि रहवासी घरों से बाहर निकलने से भय खा रहे हैं। आए दिन कुत्ते काटने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना दो से तीन मरीज रेबीज के टीके लगवाने पहुंच रहे हैं औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण बिरगांव, उरला, सरोरा और रावांभाठा में लाखों की संख्या में मजदूर निवास करते हैं। वहीं भारी वाहनों का आवागमन लगातार बना रहता है।
चारों तरफ गंदगी पसरी होने के कारण बेसहारा पशुओं का हमेशा जमावड़ा लगा रहता है। बरसात के दिनों में यहां की स्थिति और भी भयानक हो जाती है। बरसात में संक्रमण बढ़ने का असर मनुष्यों के साथ-साथ बेसहारा मवेशियों, कुत्तों पर भी पड़ता है, जिससे वे आक्रमक होकर लोगों के साथ जानवरों को भी काटने से पीछे नहीं हटते।
कुत्ते की नसबंदी ठंडे बस्ते में
पिछले कई सालों से सरकार की ओर से कई योजनाएं लाई गई हैं। इनमें से बेसहारा कुत्तों की नसबंदी और कुत्तों को सघन आबादी वाले क्षेत्रों से हटाकर अन्यत्र स्थान पर छोड़ने का था, परंतु ये योजनाएं अब सुस्त पड़ गईं, नतीजतन आज भी लोगों को कई तरह की समस्या से जूझना पड़ रहा है। आम जनता को सुरक्षा और सुविधा प्रदान करने में प्रशासन नाकाम है।
बिरगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डा.ए. कुमार ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिरगांव में रोज दो से तीन मरी रेबीज के टीके लगवाने पहुंच रहे हैं। क्षेत्र में यातायात की समस्या बढ़ गई है, जिसका सीधा असर साफ-सफाई पर पड़ रहा है। वाहनों की पार्किंग व्यवस्थित ढंग से नहीं होने के कारण चारों तरफ गंदगी ही गंदगी फैली हुई है, क्योंकि कुछ क्षेत्र परिवहन विभाग रावांभाठा और कुछ नगर निगम के अंतर्गत आता है, इसलिए दोनों विभागों को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी, तभी साफ-सुथरा वातावरण मिल पाएगा।


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