आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मद्देनजर हरियाणा में तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का आयोजन किया जा रहा है. यहां आज तीसरे दिन आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि ईरान के खामेनेई पर दत्तात्रेय ने कहा कि भारत की परम्परा रही है जीवित्त रहते , आपका विरोध हो सकता है लेकिन मरने पर उनका कोई विरोध नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि विरोध ठीक है लेकिन ये शन्तिपूर्वक होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि संगठनात्मक दृष्टि से संघ कार्य का विस्तार देश भर में प्रयत्न किया गया है. अंडमान, अरुणाचल और लेह जैसे सुदूरवर्ती जगहों पर संघ की शाखाएं चलने लगी हैं. दुर्गम क्षेत्रों में भी शाखा शुरू करना हमारा लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन को देश में सुचारू रूप से लागू करने के लिए कोशिश जारी है.
दत्तात्रेय ने कहा कि संघ की शाखा में आने वाले नागरिक हिंदुस्तान की समग्रता से सोचते हैं. वो राज्य और क्षेत्र से ऊपर उठकर संपूर्ण राष्ट्र के दृष्टि से देखते हैं. वो जाति समुदाय से ऊपर उठकर देखते हैं. दत्तात्रेय ने कहा कि शाखा की गुणवत्ता को बढ़ाना और बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि देश के प्रति सही जानकारी (narrative) सकारात्मक सोच के साथ दुनिया को बताने की कोशिश है.
‘औपनिवेशिक मानसिकता को दूर करना हमारी प्राथमिकता’
सरकार्यवाह दत्तात्रेय ने कहा कि औपनिवेशिक मानसिकता को दूर करना हमारी प्राथमिकता रहती है. उन्होंने कहा कि समाज के लिए सज्जन शक्तियों को एक साथ लाने का प्रयास करते हैं. उन्होंने शताब्दी वर्ष गृह संपर्क भी किया. यहां युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई गई है. उन्होंने बताया कि अंडमान के 9 टापू में 13 हजार पोर्ट ब्लेयर में सरसंघचालक जी के कार्यक्रम में आए.
‘देशभर में हुए विशेष कार्यक्रम’
अरुणाचल में 37 हजार लोग अब तक के कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी का विशेष कार्यक्रम, वंदे मातरम के 150 वीं जयंती पर विशेष कार्यक्रम देशभर में हुए. उन्होंने बताया कि 2134 कार्यक्रम गुरुतेग बहादुर शताब्दी वर्ष पर हुए. इसमें लगभग 7 लाख लोगों ने हिस्सा लिया. 9वें गुरु सबके लिए समस्त भारत के लिए. विशेष प्रशिक्षण वर्ग 15-21 दिनों का 75 वर्ग अप्रैल से जून के बीच आयोजित होगा. उन्होंने बताया कि गोबर और गोमूत्र का उपयोग कर अपने छतों पर प्राकृतिक खेती हरित घर का कांसेप्ट हमने शुरू किया है.
उन्होंने बताया कि कार्य विस्तार के साथ सुचारू चलाने के लिए, विकेंद्रीकरण का विचार किया है. प्रांत की जगह आगे संभाग किया है. ये विस्तार शताब्दी वर्ष के बाद होगा. अगले प्रतिनिधि सभा तक पुरानी व्यवस्था ही चलेगा. उन्होंने जानकारी दी कि अभी 45 प्रांत है उसके जगह अब आगे 80 से अधिक संभाग काम करेंगें.



देश





















