शहडोल: बदलते वक्त के साथ खेती किसानी भी बहुत बदल रही है और नई-नई सुविधाएं भी आ रही हैं. ऐसे में अब खेती की मिट्टी की जांच करना भी बहुत जरूरी है. अगर आपके खेतों में पैदावार घटने लगी है तब तो और जरूरी है कि आप अपनी मिट्टी की जांच कराएं. जिससे पोषक तत्वों की कमी का पता लगा सके कि आखिर किन वजहों से आपके खेतों में पैदावार घट रही है. लेकिन मिट्टी की जांच करने के लिए जो मिट्टी का नमूना कलेक्ट करते हैं उसके लिए कई सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं और विशेष तरीके से नमूना भी लिया जाता है. इसके लिए अप्रैल और मई का महीना ही बेस्ट माना जाता है.
मिट्टी का सैम्पल लेने से पहले बरतें सावधानी
शहडोल के मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला के मृदा विशेषज्ञ डॉक्टर प्रदीप कुमार राणा बताते हैं कि “मिट्टी की जांच के लिए अगर आप अपने खेतों से सैंपल ले रहे हैं तो कुछ सावधानी बरतनी जरूरी हैं. मिट्टी का सैम्पल लेने के लिए सबसे सही समय अप्रैल से लेकर मई तक होता है. सूखी मिट्टी का ही नमूना लें. अच्छी मिट्टी परीक्षण करने के लिए मिट्टी का नमूना बड़ी सावधानी से लें, पेड़ के नीचे की मिट्टी नहीं लेना चाहिए.”
मिट्टी का नमूना लेने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
मृदा विशेषज्ञ डॉक्टर प्रदीप कुमार राणा आगे बताते हैं कि “ढलान वाली जगह में जहां एक तरफ ऊंची और एक ओर नीची जमीन है, जहां पानी इकट्ठा होता है, वहां का नमूना अलग से लें और ऊंचे भाग का नमूना अलग से लें. मिट्टी का जहां पर कलर चेंज हो रहा है वहां का नमूना अलग तरीके से जरूर लेना चाहिए. इसके अलावा मिट्टी का नमूना लेने के लिए जिस औजार का इस्तेमाल कर रहे हैं वो औजार साफ सुथरा होना चाहिए.”
ऐसी गलती कभी न करें किसान
किसानों को नमूना लेते समय एक और सावधानी रखनी चाहिए. कभी-कभी किसान गोबर की खाद या रासायनिक खाद खेत में डालने के बाद मिट्टी का नमूना लेते हैं, अगर आप मिट्टी की कमी को ट्रेस करना या कमी को देखना चाहते हैं तो खेतों में ये सब चीज इस्तेमाल करने के पहले ही मिट्टी का नमूना लें.
सैम्पल कलेक्ट करने का सही तरीका
मिट्टी का सैम्पल लेने के लिए जिस जगह से मिट्टी का नमूना ले रहे हैं, उस जगह की ऊपरी परत को थोड़ा सा हटा दें. नमूना लेने के लिए इस्तेमाल होने वाले औजार को पूरी तरह साफ कर लेना चाहिए. वी आकार का 15 से 20 सेंटीमीटर पहले गड्ढा कर लें. उसके बाद वहां की मिट्टी को पूरी तरह से फेंक देना है, फेंकने के बाद में जब वी आकर का गड्ढा पूरी तरह से खाली हो जाए, तो खुर्पी के माध्यम से उसके चारों ओर खुरच के उस मिट्टी के नमूने को अलग रखें, इसी प्रोसेस को जमीन के पांच जगह को चिन्हित करके करना है. इसे जिग जैग सिस्टम कहते हैं, चारों कोनों और बीच सेंटर से मिट्टी का नमूना लेना है.
चांद के आकार में रखें नमूना
डॉक्टर प्रदीप कुमार राणा बताते हैं, ”पांचों जगह से इसी तरह से सावधानी से मिट्टी का सैम्पल कलेक्ट करना है. इस तरह से करते-करते ढाई किलो की मिट्टी आ जाएगी, तो उसे एक साफ बर्तन में इकट्ठा कर लें. नमूना जमा करने के लिए किसानों को साफ पॉलिथीन या बोरी का इस्तेमाल करना चाहिए. मिट्टी का ढेर लगाकर गोल चंद्रमा आकार का एक गोला बना लें, और उसके बाद में उस पर प्लस का निशान बनाएं, तो मिट्टी चार भागों में बंट जाएगी, उसमें एक नंबर और तीन नंबर के भाग को मिला लेना है, दो नंबर और चार नंबर के भाग को फेंक देना है.
जमीन की खुल जाएगी पूरी कुंडली
फिर दोबारा से उसी विधि का प्रयोग करते हुए जो एक नंबर और तीन नंबर की मिट्टी बची है उसका एक गोल चंद्रमा बनाना है, फिर उसमें प्लस का निशान बनाएं. चार भागों में बांटे, अब यहां पर एक और तीन वाले भाग को फेंकना है, और दो और चार वाले भाग को रखना है.
आखिर में मिट्टी का नमूना साफ पॉलिथीन में इकट्ठा करके मृदा जांच प्रयोगशाला में जमा करवायें, जहां मिट्टी जांच की जाती है. मिट्टी नमूने के साथ किसान अपना नाम, अपने पिताजी का नाम, मोबाइल नंबर, जमीन का खसरा नंबर, रकबा नंबर और मिट्टी नमूना लेने का दिनांक भी दर्ज करें. इसके अलावा पूर्व में कौनसी फसल बोए थे और आगामी फसल कौन सा लगाने वाले हैं, ये जानकारी भी मिट्टी नमूने के साथ जांच प्रयोगशाला में जमा करवायें.
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