इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में बेंचों का नया रोस्टर जारी किया है. इसके तहत जस्टिस अतुल श्रीधरन अब सिविल मामलों की सुनवाई करेंगे. यह बदलाव उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है.
यह बदलाव महज रुटीन नहीं माना जा रहा, क्योंकि जस्टिस श्रीधरन इन दिनों बरेली के आंवला क्षेत्र के मोहम्मदगंज गांव में नमाज प्रकरण को लेकर सुर्खियों में थे. बरेली नमाज मामले में सख्त रुख बरेली वाले मामले में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने प्रशासन पर सख्ती दिखाई थी. अदालत ने न सिर्फ मुस्लिम युवक हसीन खान को 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए, बल्कि तत्कालीन बरेली डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य को तलब किया. बेंच ने कंटेंप्ट नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी थी कि निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने में बाधा डालना अदालत के पहले के आदेशों का उल्लंघन है. 2026 से चल रहा था प्रकरण यह प्रकरण जनवरी 2026 से चल रहा था, जब मोहम्मदगंज गांव में निजी आवास पर सामूहिक नमाज पर रोक लगाने का आरोप लगा था. अदालत ने 11 मार्च 2026 को सुरक्षा आदेश दिए और 23 मार्च को डीएम-एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा था. जस्टिस अतुल श्रीधरन मूल रूप से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज थे. अक्टूबर 2025 में उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट में किया गया था.


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