ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका में संसद की शक्तियों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. क्या राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के युद्ध शुरू कर सकते हैं. यह सवाल अब फिर से चर्चा में है. अमेरिका ने 28 फरवरी को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था. इसके बाद तेल की कीमतें बढ़ गईं और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी. युद्ध के दौरान ही ईरान के मिनाब में एक स्कूल पर हमले में बच्चों की मौत हो गई. इस खबर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की आलोचना भी हुई.
अमेरिकी संविधान के मुताबिक, युद्ध की घोषणा का अधिकार कांग्रेस के पास होता है. लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के हमले शुरू कर दिए और इसे सैन्य अभियान कहा. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान से तत्काल खतरा था, इसलिए हमला जरूरी था. हालांकि, उनके पूर्व अधिकारियों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं.
85 साल पहले औपचारिक युद्ध लड़ा गया
अमेरिका ने आखिरी बार 8 दिसंबर 1941 को औपचारिक रूप से युद्ध घोषित किया था, जब पर्ल हार्बर हमले के बाद जापान के खिलाफ जंग शुरू हुई थी. इसके बाद से ज्यादातर मामलों में कांग्रेस ऑथराइजेशन फॉर यूज ऑफ मिलिट्री फोर्स (AUMF) देती रही है, जिससे सेना को सीमित कार्रवाई की अनुमति मिलती है. खाड़ी युद्ध, अफगानिस्तान युद्ध और इराक युद्ध में कांग्रेस ने ऐसी ही मंजूरी दी थी.
हालांकि कई बार अमेरिकी राष्ट्रपति ने बिना इस मंजूरी के भी बड़े सैन्य ऑपरेशन किए हैं. अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप ने फिर वही गलती दोहराई है, जिसकी वजह से अमेरिका 11 बार जंग में फंस चुका है. आइए अमेरिका की उन 11 सैन्य कार्रवाईयों को जानते हैं, जिसमें कांग्रेस की मंजूरी नहीं ली गई.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से कांग्रेस ने धीरे-धीरे युद्ध के अधिकार राष्ट्रपति को दे दिए हैं. आज स्थिति यह है कि राष्ट्रपति अक्सर अपनी शक्तियों का विस्तार करते हुए सैन्य कार्रवाई कर देते हैं और कांग्रेस बाद में प्रतिक्रिया देती है. हालांकि बिना मंजूरी के युद्ध में कूदने के लंबे और गंभीर परिणाम हो सकते हैं. अगर इन 11 मामलों में पहले कांग्रेस से मंजूरी ली जाती, तो कुछ युद्धों को हरी झंडी मिल जाती, कुछ में देरी होती या शर्तें लगतीं और कुछ जंग शायद शुरु भी नहीं होते.


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