मैहर: गोलामाठ क्षेत्र स्थित प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर भारी भीड़ पहुंची. अल सुबह भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया. उन्हें फूल, बेलपत्र, चंदन और भस्म भेंट किया गया. इसके बाद आरती की गई. आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा. श्रद्धालु जलाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की. मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध मान्यता यह है कि इसका निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने एक ही दिन में किया था. यही कारण है कि यह मंदिर भक्तों के बीच विशेष श्रद्धा और चमत्कारिक विश्वास का केंद्र है. महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन होता है. हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से भगवान शिव के दर्शन पहुंच रहे हैं. इसके साथ ही पूरी रात भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे. गोलामाठ स्थित शिव मंदिर का निर्माण दक्षिण भारत के चोल वंश के शासकों द्वारा कराया गया था. इस संबंध में प्रमाणिक अभिलेख सीमित है, लेकिन मंदिर की वास्तु शैली और निर्माण तकनीक इसकी प्राचीनता को दर्शाती है. विशाल पत्थरों को सटीक संतुलन के साथ जोड़ा गया है, जो उस समय की उन्नत शिल्पकला का उदाहरण प्रस्तुत करता है. मंदिर का गर्भगृह, शिखर और मंडप पारंपरिक भारतीय मंदिर वास्तु शैली की झलक दिखाते हैं. गोलामाठ स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मैहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. मैहर की यह मंदिर करीब 1600 वर्ष पुराना है. श्रृंगार पुजारी चूड़ामणि बड़ौलिया बताते हैं कि “मंदिर 11वीं शताब्दी का है. शिलालेख में भी इसका उल्लेख है. मान्यता है कि एक दिन में यह मंदिर बनाया गया है और इस मंदिर में एक भी जोड़ नहीं है. चोल वंश के शासकों द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था, तब से भगवान भोलेनाथ की कृपा मैहर वासियों पर बनी हुई है.”मान्यता, एक ही दिन बनाया गया था मंदिर
प्राचीनता को दर्शाता है मंदिर की वास्तुशैली
मैहर की ऐतिहासिक पहचान है शिव मंदिर
मैहर: गोलामाठ क्षेत्र स्थित प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर भारी भीड़ पहुंची. अल सुबह भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया. उन्हें फूल, बेलपत्र, चंदन और भस्म भेंट किया गया. इसके बाद आरती की गई. आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा. श्रद्धालु जलाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की.
मान्यता, एक ही दिन बनाया गया था मंदिर
मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध मान्यता यह है कि इसका निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने एक ही दिन में किया था. यही कारण है कि यह मंदिर भक्तों के बीच विशेष श्रद्धा और चमत्कारिक विश्वास का केंद्र है. महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन होता है. हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से भगवान शिव के दर्शन पहुंच रहे हैं. इसके साथ ही पूरी रात भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे.
प्राचीनता को दर्शाता है मंदिर की वास्तुशैली
गोलामाठ स्थित शिव मंदिर का निर्माण दक्षिण भारत के चोल वंश के शासकों द्वारा कराया गया था. इस संबंध में प्रमाणिक अभिलेख सीमित है, लेकिन मंदिर की वास्तु शैली और निर्माण तकनीक इसकी प्राचीनता को दर्शाती है. विशाल पत्थरों को सटीक संतुलन के साथ जोड़ा गया है, जो उस समय की उन्नत शिल्पकला का उदाहरण प्रस्तुत करता है. मंदिर का गर्भगृह, शिखर और मंडप पारंपरिक भारतीय मंदिर वास्तु शैली की झलक दिखाते हैं.
मैहर की ऐतिहासिक पहचान है शिव मंदिर
गोलामाठ स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मैहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. मैहर की यह मंदिर करीब 1600 वर्ष पुराना है. श्रृंगार पुजारी चूड़ामणि बड़ौलिया बताते हैं कि “मंदिर 11वीं शताब्दी का है. शिलालेख में भी इसका उल्लेख है. मान्यता है कि एक दिन में यह मंदिर बनाया गया है और इस मंदिर में एक भी जोड़ नहीं है. चोल वंश के शासकों द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था, तब से भगवान भोलेनाथ की कृपा मैहर वासियों पर बनी हुई है.”



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