इंदौर: देश में रेलों के विद्युतीकरण के इतिहास को 100 साल पूरे होने पर भारत सरकार ने पहली बार रंगीन सिक्का जारी किया है. हाल ही में जारी किए गए ₹100 के इस पहले रंगीन सिक्के पर वंदे भारत ट्रेन नजर आ रही है जो रेलों के विद्युतीकरण और आधुनिक दौर की रेल के रूप में मील का पत्थर साबित है.
रेल विद्युतीकरण की शुरुआत 1925 में हुई
दरअसल भारत में 1925 के पहले तक कोयले और डीजल से ट्रेन चलती थी. हालांकि, इसके बाद रेलों के विद्युतीकरण की शुरुआत हुई जिसके तहत 1925 में मुंबई से कुर्ला के बीच पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन हर्बल लाइन पर चली थी जिसकी विद्युत क्षमता 15 किलोवाट डीसी थी. इसके बाद से ही भारतीय रेल में रेल लाइनों के विद्युतीकरण की शुरुआत हुई और देखते ही देखते इन 100 सालों में अब लगभग पूरी तरह से ब्रॉड गेज लाइन का 100% विद्युतीकरण हो चुका है.
विद्युतीकरण से जीरो कार्बन उत्सर्जन
रेलों के विद्युतीकरण से न केवल कोयला और डीजल जैसे प्राकृतिक ईंधन की बचत हो सकती है, बल्कि जीरो कार्बन उत्सर्जन से देश के पर्यावरण को भी रेल से होने वाले प्रदूषण से बचाया जा सका है. भारतीय रेल के मुताबिक इंडिया गवर्नमेंट मिंट ने यह सिक्का जारी किया है जो ₹100 मूल्य का है. इसका डिजाइन खनन मंत्रालय के अधीन प्रिंटिंग और माइनिंग कॉरपोरेशन द्वारा किया गया है.
यह है सिक्के की खासियत
देश का पहला रंगीन सिक्का मिश्र धातु का बना है जिसमें सबसे ज्यादा 50% चांदी है, जबकि तांबा 40% और निकल एवं जास्ता 5% के रूप में है. सिक्के का भजन 35 ग्राम है जिसके परिधि छोर पर 200 दांत बने हुए हैं. चांदी के दिखने वाले सिक्के में लाल रंग की वंदे भारत ट्रेन देखने के कारण सिक्का अपने आप में आकर्षक एवं उपयोगी है. दरअसल, सिक्के को जारी करते समय इसकी कीमत 8700 थी. लेकिन अब जबकि चांदी के रेट बढ़ गए हैं तो इस सिक्के की कीमत 10,000 रुपये को भी पार कर गई है.