भोपाल। प्रदेश में गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया एक बार फिर टल गई है। अब न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,885 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदी एक अप्रैल के बजाय 10 अप्रैल से शुरू होगी। इंदौर-उज्जैन (मालवांचल), नर्मदापुरम और भोपाल संभाग में 10 अप्रैल से खरीदी प्रारंभ होगी, जबकि अन्य संभागों में यह प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू की जाएगी। कैबिनेट समिति की बैठक में लिया गया यह निर्णय किसानों के लिए अहम माना जा रहा है, हालांकि देरी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल भी उठाए हैं। सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण बोरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हुई। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने चार करोड़ सिंगल यूज बोरे खरीदने के लिए टेंडर जारी किए हैं। जैसे ही इनकी आपूर्ति होगी, खरीदी में तेजी लाई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बोरों की उपलब्धता सुनिश्चित होते ही प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
बोरों की कमी बनी देरी की वजह
भोपाल। प्रदेश में गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया एक बार फिर टल गई है। अब न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,885 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदी एक अप्रैल के बजाय 10 अप्रैल से शुरू होगी।
इंदौर-उज्जैन (मालवांचल), नर्मदापुरम और भोपाल संभाग में 10 अप्रैल से खरीदी प्रारंभ होगी, जबकि अन्य संभागों में यह प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू की जाएगी। कैबिनेट समिति की बैठक में लिया गया यह निर्णय किसानों के लिए अहम माना जा रहा है, हालांकि देरी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल भी उठाए हैं।
बोरों की कमी बनी देरी की वजह
सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण बोरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हुई। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने चार करोड़ सिंगल यूज बोरे खरीदने के लिए टेंडर जारी किए हैं। जैसे ही इनकी आपूर्ति होगी, खरीदी में तेजी लाई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बोरों की उपलब्धता सुनिश्चित होते ही प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।


मध्यप्रदेश


























