ओंकारेश्वर | धर्म, संस्कृति एवं आस्था समाचार
निमाड़ के प्रसिद्ध लोकपर्व ‘गणगौर माता’ के उत्सव को लेकर तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर के बाड़ी स्थानों में सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में वर्षों पूर्व से ब्रह्मपुरी, विष्णुपुरी और शिवपुरी क्षेत्रों में स्थित पुजारियों के यहां पूर्वजों के समय से बाड़ी बोई जा रही है। पुजारी परिवार आज भी निमाड़ की इस लोकप्रिय गणगौर परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ निर्वाह कर रहे हैं।
चूंकि ओंकारेश्वर को गणगौर माता का ‘मायका’ माना जाता है, इसलिए यहां अन्य स्थानों से एक दिन पहले ही माता की बाड़ी में ज्वारे बोए जाते हैं।
📅 गणगौर पर्व का पूरा कार्यक्रम और तिथियां:
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कल 13 मार्च (शुक्रवार): चैत्र कृष्ण (10) दशमी को गणगौर माता के जाग (ज्वारे) बोए जाएंगे।
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17 मार्च: गणगौर माता घुघराएंगी।
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20 मार्च (शुक्रवार): चैत्र कृष्ण दूज को माता की बड़ी खोली जाएगी।
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21 मार्च (शनिवार): चैत्र कृष्ण तीज को गणगौर माता पानी पीने घाट पर जाएंगी। मन्नत वाले भक्त एक दिन के लिए माता को ‘मेहमान’ बनाकर अपने घर ले जाएंगे। रात्रि जागरण और सुबह पूजन व जोड़े जिमाने का कार्यक्रम होगा।
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22 मार्च: मां नर्मदा में माता का विसर्जन होगा। मन्नत वाले भक्त जो रथ नहीं श्रृंगारेंगे, वे चांदी की टोकनी लेकर जाते हैं।
🌸 150 वर्षों से सज रही है ओंकारेश्वर की सबसे बड़ी बाड़ी
ओंकारेश्वर की अति प्राचीन और करीब 150 वर्ष पुरानी गणगौर माता बाड़ी के पुजारी पंडित ललित दुबे ने बताया कि उनके निवास पर सबसे अधिक वार्ड और जनसंख्या होने के कारण यह ओंकारेश्वर की सबसे बड़ी माता बाड़ी (मंदिर) है। यहां 150 से अधिक रथ माता के बोने के लिए आते हैं। कल 13 मार्च से ज्वारे बोए जाएंगे और बाड़ी स्थान पर सात दिनों तक निमाड़ के लोकप्रिय भजन, नृत्य और गाने-बजाने का सिलसिला चलता रहेगा।
🙏 ब्रह्मपुरी: 70 वर्षों की परंपरा
ब्रह्मपुरी क्षेत्र स्थित पुजारी श्रीमती गजानंद गिरी ने बताया कि ब्रह्मपुरी क्षेत्र में लगभग 70 वर्षों से उनके निवास पर माता की बाड़ी बोई जा रही है, जहां निरंतर सात दिनों तक पूजन होगा। इस वर्ष मन्नत अनुसार माता को बोढ़ाकर उनके निवास पर ही लाया जाएगा। 24 घंटे मेहमान के रूप में पूजा और भंडारे के बाद माता जी का विसर्जन होगा। इसके दूसरे दिन ब्रह्मपुरी क्षेत्र में सार्वजनिक माता को भी बोढ़ाकर लाया जाएगा।
🚧 सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के चलते शिवपुरी की बाड़ी में बदलाव
मांधाता शिवपुरी क्षेत्र स्थित पंडित रामचंद्र परसाई ने बताया कि लगभग 200 वर्षों से शिवपुरी क्षेत्र में गणगौर माता की बाड़ी उनके निवास पर बोई जाती रही है। लेकिन, ‘सिंहस्थ 2028’ की तैयारियों को लेकर श्री जी मंदिर ट्रस्ट द्वारा जूना महल का निर्माण कार्य चल रहा है। किसी प्रकार की जनहानि न हो, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से उनके निवास को खाली कर दिया गया है।
इस परिस्थिति को देखते हुए नगर परिषद अध्यक्ष मनीषा परिहार एवं क्षेत्र के भक्तों ने इस वर्ष माता की बाड़ी बोने के लिए सार्वजनिक स्थान ‘मंगल भवन’ में पूरी व्यवस्था की है, जहां श्रद्धालु दर्शन और पूजन कर सकेंगे।



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