रांचीः राजधानी रांची में इन दिनों डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. शहर के अलग-अलग इलाकों से आवारा कुत्तों के काटने की शिकायतें सामने आ रही हैं. इस स्थिति को देखते हुए रांची नगर निगम ने स्ट्रीट डॉग की संख्या नियंत्रित करने और रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी की रोकथाम के लिए नसबंदी और टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है.
प्रशासक के निर्देशानुसार रांची नगर निगम द्वारा एनजीओ डब्ल्यूवीएस होप एंड एनिमल संस्था के सहयोग से शहर में स्ट्रीट डॉग की नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण करना और रेबीज जैसी गंभीर बीमारी से लोगों को सुरक्षित रखना है.
306 कुत्तों की नसबंदी नगर निगम की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 1 जनवरी 2026 से 10 मार्च 2026 तक अभियान के तहत कुल 439 स्ट्रीट डॉग को पकड़ा गया. इनमें से 306 कुत्तों की नसबंदी की गई, जबकि 685 कुत्तों का टीकाकरण किया गया. निगम का कहना है कि शहर में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इस अभियान को और तेज किया गया है. 53 वार्डों में चल रहा है अभियान रांची नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा द्वारा उपलब्ध कराए गए रोस्टर के अनुसार शहर के सभी 53 वार्डों में यह अभियान चलाया जा रहा है. इसके अलावा सरकारी अस्पतालों, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों के आसपास भी विशेष अभियान नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा स्ट्रीट डॉग को पकड़कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण किया जा सके. आवारा कुत्तों के कारण डॉग बाइट्स के मामले अधिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से डॉग बाइट के मामलों में भी वृद्धि होती है. ऐसे में नसबंदी और टीकाकरण ही इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान माना जाता है. नगर निगम का दावा है कि अभियान के जरिए धीरे-धीरे स्ट्रीट डॉग की संख्या को नियंत्रित किया जाएगा और रेबीज के खतरे को कम किया जा सकेगा. नगर निगम की अपील नगर निगम ने शहरवासियों से भी सहयोग की अपील की है कि यदि किसी इलाके में स्ट्रीट डॉग से जुड़ी समस्या या डॉग बाइट की घटना सामने आती है, तो इसकी सूचना नगर निगम के टोल फ्री नंबर 1800-570-1235 पर दी जा सकती है. नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि शहर में स्ट्रीट डॉग की संख्या पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके और नागरिकों को सुरक्षित व स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराया जा सके.



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