कालमुखी | धर्म, संस्कृति एवं आस्था समाचार
ग्राम कालमुखी में लोक आस्था के महापर्व ‘गणगौर’ का अपना एक स्वर्णिम और प्राचीन इतिहास रहा है। प्राचीन समय से ही यहां की ‘गणगौर वाड़ी’ आसपास के क्षेत्रों के लिए प्रमुख श्रद्धा का केंद्र रही है। ग्रामवासियों के सामूहिक सहयोग और दानदाताओं की पुनीत पहल से इस वर्ष यह पर्व और भी खास होने जा रहा है, क्योंकि गांव में नवनिर्मित ‘भव्य गणगौर भवन’ का उद्घाटन कर दिया गया है।
✨ उपाध्याय परिवार से ग्रामीणों को मिली वाड़ी की जिम्मेदारी
विगत कई दशकों से कालमुखी के प्रतिष्ठित उपाध्याय परिवार द्वारा गणगौर वाड़ी की सेवा और पूजा-अर्चना की जाती रही है। सामयिक कारणों के चलते पिछले दो वर्षों से उपाध्याय परिवार ने गणगौर की वाड़ी ग्रामवासियों को सौंप दी है।
अब ग्रामवासियों की सर्वसम्मति से वाड़ी की सेवा और पूजन का यह पवित्र कार्य राधे गोविंद मुजमेर के परिवार को सौंपा गया है।
बाड़ी के सुचारू संचालन और व्यवस्थाओं को देखने के लिए ग्रामवासियों ने एक विशेष समिति का भी गठन किया है।
गणगौर बाड़ी की सेवा और आयोजन के लिए गांव में कोई एक निश्चित स्थान नहीं होने के कारण पूर्व में कई परेशानियां आती थीं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए गांव के दानदाताओं ने आगे आकर मिसाल पेश की:🌱 भूमि दान और जनसहयोग से साकार हुआ भवन निर्माण
उपाध्याय परिवार का सहयोग: भवन निर्माण के लिए उपाध्याय परिवार द्वारा दान स्वरूप एक निश्चित राशि देने का निर्णय लिया गया।
5 लाख का भूखंड दान: ग्राम के सरपंच प्रतिनिधि गोविंद वर्मा एवं संजय वर्मा ने अपने पिता स्वर्गीय श्री मामराज वर्मा की स्मृति में लगभग 5 लाख रुपये मूल्य का एक बेशकीमती भूखंड सहर्ष दान स्वरूप प्रदान किया।
दान किए गए इसी भूखंड पर सभी ग्रामवासियों के आर्थिक सहयोग और श्रमदान से एक भव्य ‘गणगौर भवन’ का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। पूरे उत्साह और विधि-विधान के साथ इस नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया गया। समिति और ग्रामीणों ने हर्ष के साथ बताया कि इस वर्ष से इसी नई बाड़ी (भवन) में ज्वारे बोकर पारंपरिक गणगौर पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।🌸 इसी वर्ष से नए भवन में बोए जाएंगे ज्वारे



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