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राज्यसभा से होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020 पास

होम्योपैथी केन्द्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020 राज्यसभा से पारित हो गया है। इसके साथ ही भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020 को भी पास कर दिया गया है। संशोधनों के माध्‍यम से होम्योपैथी शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक नियामक सुधार सुनिश्चित होंगे और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शिता एवं जवाबदेही तय की जाएगी।

क्या होगा लाभ 

  • इस बिल के पास होने से अब होम्योपैथी के छात्रों को गुणवत्ता के साथ-साथ सस्ती पढ़ाई मुहैया कराई जा सकेगी।
  • इस बिल में होम्योपैथी से संबंधित उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जा सकेगी।
  • इसके साथ ही आयोग देश के सभी हिस्सों में किफायती स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ावा देगा।
  • केंद्रीय होम्योपैथी परिषद के स्थान पर राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग का गठन किया जा सकेगा।

विपक्षी दलों ने उठाया सवाल 
दरअसल राज्यसभा में शुक्रवार को कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सरकार से सवाल किया कि होमियोपैथी केंद्रीय परिषद के गठन में तीन साल क्यों लग गए। कांग्रेस सदस्य रिपुन बोरा ने कहा कि होमियोपैथी केंद्रीय परिषद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और उसके स्थान पर संचालक मंडल की स्थापना की गयी थी। शुरू में कहा गया था कि एक साल के अंदर परिषद का गठन कर लिया जाएगा। बाद में वह समय बढ़ाकर दो साल कर दिया।

70 प्रतिशत लोग होमियोपैथी से कराते हैं ईलाज
बोरा सदन में होमियोपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 पर एक साथ हुयी चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि परिषद के गठन में इतनी देर क्यों हुयी कि सरकार को अध्यादेश और अब विधेयक लाना पड़ा। सपा सदस्य रामगोपाल वर्मा ने भी होमियोपैथी परिषद के गठन में देरी पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार समय से परिषद का गठन क्यों नहीं कर पा रही है। यादव ने होमियोपैथी और आयुर्वेद सहित भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की लोकप्रियता का जिक्र करते हए कहा कि भारत में करीब 70 प्रतिशत लोग इनसे इलाज कराते हैं।

होम्योपैथी केन्द्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020 राज्यसभा से पारित हो गया है। इसके साथ ही भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020 को भी पास कर दिया गया है। संशोधनों के माध्‍यम से होम्योपैथी शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक नियामक सुधार सुनिश्चित होंगे और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शिता एवं जवाबदेही तय की जाएगी।

क्या होगा लाभ 

  • इस बिल के पास होने से अब होम्योपैथी के छात्रों को गुणवत्ता के साथ-साथ सस्ती पढ़ाई मुहैया कराई जा सकेगी।
  • इस बिल में होम्योपैथी से संबंधित उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जा सकेगी।
  • इसके साथ ही आयोग देश के सभी हिस्सों में किफायती स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ावा देगा।
  • केंद्रीय होम्योपैथी परिषद के स्थान पर राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग का गठन किया जा सकेगा।

विपक्षी दलों ने उठाया सवाल 
दरअसल राज्यसभा में शुक्रवार को कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सरकार से सवाल किया कि होमियोपैथी केंद्रीय परिषद के गठन में तीन साल क्यों लग गए। कांग्रेस सदस्य रिपुन बोरा ने कहा कि होमियोपैथी केंद्रीय परिषद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और उसके स्थान पर संचालक मंडल की स्थापना की गयी थी। शुरू में कहा गया था कि एक साल के अंदर परिषद का गठन कर लिया जाएगा। बाद में वह समय बढ़ाकर दो साल कर दिया।

70 प्रतिशत लोग होमियोपैथी से कराते हैं ईलाज
बोरा सदन में होमियोपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 पर एक साथ हुयी चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि परिषद के गठन में इतनी देर क्यों हुयी कि सरकार को अध्यादेश और अब विधेयक लाना पड़ा। सपा सदस्य रामगोपाल वर्मा ने भी होमियोपैथी परिषद के गठन में देरी पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार समय से परिषद का गठन क्यों नहीं कर पा रही है। यादव ने होमियोपैथी और आयुर्वेद सहित भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की लोकप्रियता का जिक्र करते हए कहा कि भारत में करीब 70 प्रतिशत लोग इनसे इलाज कराते हैं।

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