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हाईकोर्ट पहुंचा लक्ष्मी विलास पैलेस होटल का मामला, सीबीआइ कोर्ट के आदेश को चुनौती

जोधपुर। उदयपुर की प्रसिद्ध लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को महज 7.50 करोड़ रुपए में बेचकर सरकार को करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के मामले में सीबीआइ की विशेष कोर्ट जोधपुर के जज पूरण कुमार शर्मा ने प्रसंज्ञान लेते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, पूर्व आईएएस अफसर प्रदीप बैजल व भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक श्रीमती ज्योत्‍सना शूरी सहित पांच जनों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। अब यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया है।

भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्‍सना शूरी ने सीबीआइ के इस आदेश को अनुचित बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी ओर से हाईकोर्ट में पूर्व केंद्रीय विधि राज्य मंत्री व सांसद पीपी चौधरी बतौर वरिष्ठ अधिवक्ता पैरवी करेंगे। हालांकि, शुक्रवार को उन्होंने हाईकोर्ट के जज मनोज कुमार गर्ग के समक्ष उसी दिन सुनवाई के लिए मेंशन किया था, लेकिन जस्टिस गर्ग ने तुरंत सुनने से इनकार करते हुए इसे 22 सितंबर को सूचीबद्ध करने के आदेश दिए थे। उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी भी हाईकोर्ट में सीबीआई के कोर्ट को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

सीबीआइ कोर्ट के आदेश के बाद ललित लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को सीज कर दिया गया है और कलेक्टर ने अपने पजेशन में ले लिया है। यह होटल अब सीबीआइ कोर्ट में इस प्रकरण के अंतिम निस्तारण तक राज्य सरकार के पजेशन में रहेगा। भारत होटल्स लिमिटेड की निदेशक ज्योत्सना ने उसके खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज करने तथा होटल को कुर्क कर कलेक्टर के पजेशन में लेने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी ओर से अपराधिक पुनरीक्षण याचिका व स्थगन आदेश के लिए दो अलग-अलग याचिका दायर की गई है

इस मामले में उनकी ओर से पूर्व केंद्रीय विधि राज्य मंत्री व सांसद वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी चौधरी व अधिवक्ता उमेशकांत व्यास पैरवी करेंगे। चौधरी ने गत शुक्रवार को याचिका पर तुरंत सुनवाई के लिए जस्टिस गर्ग के समक्ष मेंशन भी किया, लेकिन उन्होंने यह आग्रह नहीं माना और 22 सितंबर को इस मामले को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में 22 सितंबर को सुनवाई होगी।

इधर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी भी हाईकोर्ट में सीबीआइ कोर्ट के आदेश को चुनौती देंगे। शौरी ने दिल्ली में कहा कि किसी भी विनिवेश का फैसला खुद उनके द्वारा या किसी अफसर द्वारा व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया गया था, बल्कि केबिनेट कमेटी द्वारा लिया गया था, जिसका नेतृत्व तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। इस कमेटी में तत्कालीन वित्त मंत्री के अलावा अन्य भी शामिल थे। शौरी ने यह भी कहा कि वह सीबीआइ कोर्ट के आदेश के विरूद्ध राजस्थान हाईकोर्ट में अपील करेंगे। उन्होंने यह भी कहा पूर्व में विनिवेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी और कोर्ट ने कहा था कि किसी भी तरह के कम मूल्यांकन के साक्ष्य नहीं है। इसलिए सीबीआई ने साक्ष्य नहीं बताते हुए केस को बंद किया था।

जोधपुर। उदयपुर की प्रसिद्ध लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को महज 7.50 करोड़ रुपए में बेचकर सरकार को करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के मामले में सीबीआइ की विशेष कोर्ट जोधपुर के जज पूरण कुमार शर्मा ने प्रसंज्ञान लेते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, पूर्व आईएएस अफसर प्रदीप बैजल व भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक श्रीमती ज्योत्‍सना शूरी सहित पांच जनों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। अब यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया है।

भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्‍सना शूरी ने सीबीआइ के इस आदेश को अनुचित बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी ओर से हाईकोर्ट में पूर्व केंद्रीय विधि राज्य मंत्री व सांसद पीपी चौधरी बतौर वरिष्ठ अधिवक्ता पैरवी करेंगे। हालांकि, शुक्रवार को उन्होंने हाईकोर्ट के जज मनोज कुमार गर्ग के समक्ष उसी दिन सुनवाई के लिए मेंशन किया था, लेकिन जस्टिस गर्ग ने तुरंत सुनने से इनकार करते हुए इसे 22 सितंबर को सूचीबद्ध करने के आदेश दिए थे। उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी भी हाईकोर्ट में सीबीआई के कोर्ट को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

सीबीआइ कोर्ट के आदेश के बाद ललित लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को सीज कर दिया गया है और कलेक्टर ने अपने पजेशन में ले लिया है। यह होटल अब सीबीआइ कोर्ट में इस प्रकरण के अंतिम निस्तारण तक राज्य सरकार के पजेशन में रहेगा। भारत होटल्स लिमिटेड की निदेशक ज्योत्सना ने उसके खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज करने तथा होटल को कुर्क कर कलेक्टर के पजेशन में लेने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी ओर से अपराधिक पुनरीक्षण याचिका व स्थगन आदेश के लिए दो अलग-अलग याचिका दायर की गई है

इस मामले में उनकी ओर से पूर्व केंद्रीय विधि राज्य मंत्री व सांसद वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी चौधरी व अधिवक्ता उमेशकांत व्यास पैरवी करेंगे। चौधरी ने गत शुक्रवार को याचिका पर तुरंत सुनवाई के लिए जस्टिस गर्ग के समक्ष मेंशन भी किया, लेकिन उन्होंने यह आग्रह नहीं माना और 22 सितंबर को इस मामले को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में 22 सितंबर को सुनवाई होगी।

इधर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी भी हाईकोर्ट में सीबीआइ कोर्ट के आदेश को चुनौती देंगे। शौरी ने दिल्ली में कहा कि किसी भी विनिवेश का फैसला खुद उनके द्वारा या किसी अफसर द्वारा व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया गया था, बल्कि केबिनेट कमेटी द्वारा लिया गया था, जिसका नेतृत्व तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। इस कमेटी में तत्कालीन वित्त मंत्री के अलावा अन्य भी शामिल थे। शौरी ने यह भी कहा कि वह सीबीआइ कोर्ट के आदेश के विरूद्ध राजस्थान हाईकोर्ट में अपील करेंगे। उन्होंने यह भी कहा पूर्व में विनिवेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी और कोर्ट ने कहा था कि किसी भी तरह के कम मूल्यांकन के साक्ष्य नहीं है। इसलिए सीबीआई ने साक्ष्य नहीं बताते हुए केस को बंद किया था।

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