अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है. होर्मुज के आसपास अमेरिकी जहाज पहुंच रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कोई ईरानी जहाज पास आया तो उसे तुरंत तबाह कर दिया जाएगा. अमेरिका की ओर से की जा रही इस नाकाबंदी से ईरान को ट्रेड में हर दिन लगभग 435 मिलियन डॉलर यानी करीब 40 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है. यह नाकाबंदी अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी सहित ईरान के पोर्ट्स और समुद्री किनारे के एरिया में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी. हालांकि, अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से होकर गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को नहीं रोकेगा.
विदेश नीति संस्थान FDD के सीनियर एक्सपर्ट मियाद मालेकी के अनुसार, ईरान पर आर्थिक इम्पैक्ट तुरंत और बहुत बड़ा हो सकता है. उन्होंने X पर एक लंबी पोस्ट में लिखा कि होर्मुज स्ट्रेट की अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी से ईरान को एक्सपोर्ट में लगभग 276 मिलियन डॉलर हर दिन का नुकसान होगा और इंपोर्ट में 159 मिलियन डॉलर हर दिन की रुकावट होगी, जिससे कुल आर्थिक नुकसान लगभग 435 मिलियन डॉलर प्रति दिन या 13 बिलियन डॉलर प्रति माह होगा.
ईरान की ट्रेड निर्भरता
ईरान के सालाना ट्रेड का 90% से ज्यादा हिस्सा जिसका वैल्यू करीब 109.7 अरब डॉलर है वह फारस की खाड़ी से होकर गुजरता है. एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई का 80% और देश की कुल GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा तेल और गैस से आता है. मालेकी ने कहा कि ईरान हर दिन लगभग 15 लाख बैरल क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट कर रहा है, जिससे युद्ध जैसी हाई कीमतों पर हर दिन लगभग 139 मिलियन डॉलर की इनकम होती है. उन्होंने कहा कि नाकाबंदी से यह काम तुरंत बंद हो जाएगा और बताया कि क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट का 92% हिस्सा संभालने वाला खारग आइलैंड इसी प्रभावित एरिया में आता है.
इस नाकेबंदी से तेल से जुड़े केमिकल्स यानी पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट भी प्रभावित होगा. ईरान में करीब 54 मिलियन डॉलर का इससे जुड़ा एक्सपोर्ट डेली प्रभावित होगा, क्योंकि यह सामान उन पोर्ट्स से भेजा जाता है जो नाकाबंदी वाले एरिया में हैं. उन पोर्ट में असलूयेह और इमाम खुमैनी पोर्ट शामिल हैं.पेट्रोकेमिकल भी होंगे प्रभावित
नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर असर
डेली लगभग 88 मिलियन डॉलर के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि लगभग 90% सामान खाड़ी के पोर्ट्स से होकर गुजरता है. एनालिसिस के अनुसार, ईरान के पास होर्मुज स्ट्रेट के बाहर बहुत कम ऑप्शंस हैं. जास्क और चाबहार जैसे पोर्ट्स खाड़ी के बड़े पोर्ट्स की तुलना में काफी कम कैपेसिटी पर काम करते हैं, जो देश के ज्यादातर ट्रेड को संभालते हैं. ईरान की ऑयल स्टोरेज कैपेसिटी से सिर्फ थोड़ी देर की राहत मिल सकती है. लगभग 20 मिलियन बैरल एक्स्ट्रा कैपेसिटी और लगातार प्रोडक्शन के साथ, यह स्टोरेज लगभग 13 दिनों में भर सकती है, जिसके बाद ऑयल वेल्स को बंद करना पड़ सकता है.
मालेकी ने चेतावनी दी कि पुराने ऑयल फील्ड्स को बंद करने से परमानेंट डैमेज हो सकता है. उन्होंने कहा कि जबरन बंद करने से हर दिन 300,000 से 500,000 बैरल प्रोडक्शन कैपेसिटी हमेशा के लिए खत्म हो सकती है, यानी सालाना 9-15 अरब डॉलर का नुकसान हमेशा के लिए हो सकता है.
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