जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत का गंभीर असर अब धरातल पर नजर आने लगा है। इस संकट की वजह से आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े ट्रांसपोर्टर तक बुरी तरह परेशान हैं। गौरतलब है कि बस्तर में देश का सबसे बड़ा परिवहन संघ मौजूद है, जो देश में कच्चे लोहे की सबसे बड़ी खदानों से आयरन ओर जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का देशव्यापी परिवहन करता है। चूंकि क्षेत्र में डीजल की किल्लत लगातार बनी हुई है, ऐसे में खदानों और औद्योगिक परिवहन में लगी भारी ट्रकों का परिचालन अब लगभग ठप होने की कगार पर पहुंच चुका है। डीजल की भारी किल्लत की वजह से पिछले 3 दिनों से बस्तर संभाग में लौह अयस्कों (आयरन ओर) की ढुलाई पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। इसके चलते बैलाडिला ट्रक यूनियन और बस्तर परिवहन संघ (BPS) के सैकड़ों से अधिक ट्रकों के पहिये पूरी तरह थमने की कगार पर पहुंच चुके हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि रायपुर ट्रक यूनियन की भी सैकड़ों ट्रकें सिर्फ ईंधन न मिलने की वजह से बस्तर के अलग-अलग ट्रांसपोर्ट नगरों और पेट्रोल पंपों के बाहर खड़ी हैं। ट्रकों पर काम करने वाले ड्राइवरों, क्लीनरों और स्थानीय मजदूरों पर भी अब रोजी-रोटी का गंभीर आर्थिक संकट गहराने लगा है। बस्तर परिवहन संघ के अध्यक्ष प्रदीप पाठक का इस गंभीर स्थिति पर कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों तक यही हाल रहा, तो परिवहन क्षेत्र से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हजारों ट्रांसपोर्टरों और मजदूरों को अपना परिवार पालना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि खदानों से लौह अयस्क तो काफी आसानी से मिल जा रहा है, लेकिन माल को तय समय पर संबंधित फैक्ट्रियों और बंदरगाहों तक पहुंचाने में बड़ी परेशानी हो रही है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगाने के बाद भी एक समय पर गाड़ियों को भरपूर डीजल नहीं मिल पा रहा है, जिससे पूरा सिस्टम चरमरा गया है। आपको बता दें कि देश की नवरत्न कंपनियों में से एक एनएमडीसी (NMDC) की दंतेवाड़ा के किरंदुल और बैलाडिला में स्थित लौह अयस्क खदानें देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खदानों में गिनी जाती हैं। यहां से हर रोज लाखों टन लौह अयस्क का परिवहन सैकड़ों ट्रकों के माध्यम से रायपुर, भिलाई और विशाखापट्टनम जैसे बड़े औद्योगिक शहरों तक किया जाता है। पिछले 3 दिनों से डीजल की किल्लत ने इस पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। ट्रांसपोर्ट नगरों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर ट्रकों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी हुई हैं। इस पूरे ईंधन संकट में सबसे बुरा हाल रायपुर ट्रक यूनियन से जुड़ी गाड़ियों का है। ये ट्रकें रायपुर से सीमेंट लेकर तो बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में सुरक्षित पहुंची हैं, लेकिन वापस लौटते समय उन्हें खदानों से लौह अयस्क ले जाने के लिए स्थानीय पेट्रोल पंपों में पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से पिछले तीन से चार दिनों से ड्राइवरों ने अपनी ट्रकें सड़क किनारे खड़ी कर दी हैं। ट्रांसपोर्टरों ने प्रशासन से मांग की है कि औद्योगिक और मालवाहक वाहनों के लिए डीजल की सुचारू उपलब्धता तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि बस्तर के सबसे बड़े व्यवसाय को पूरी तरह डूबने से बचाया जा सके।🚚 थम गए ट्रकों के पहिए: 3 दिनों से लौह अयस्क की ढुलाई बंद, बस्तर परिवहन संघ के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट
💬 परिवार पालना हुआ मुश्किल: बस्तर परिवहन संघ के अध्यक्ष प्रदीप पाठक ने जताई गहरी चिंता, माल समय पर न पहुंचने से नुकसान
🏢 नवरत्न कंपनी NMDC की खदानों पर असर: रायपुर और विशाखापट्टनम की सप्लाई चेन टूटी, सड़कों पर लगी वाहनों की लंबी कतारें
⛽ सीमेंट लेकर पहुंचे ट्रक बस्तर में फंसे: वापसी के लिए पेट्रोल पंपों में भटक रहे चालक, 4 दिनों से ठप है परिचालन
यह खबर आपको कैसी लगी?
जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत का गंभीर असर अब धरातल पर नजर आने लगा है। इस संकट की वजह से आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े ट्रांसपोर्टर तक बुरी तरह परेशान हैं। गौरतलब है कि बस्तर में देश का सबसे बड़ा परिवहन संघ मौजूद है, जो देश में कच्चे लोहे की सबसे बड़ी खदानों से आयरन ओर जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का देशव्यापी परिवहन करता है। चूंकि क्षेत्र में डीजल की किल्लत लगातार बनी हुई है, ऐसे में खदानों और औद्योगिक परिवहन में लगी भारी ट्रकों का परिचालन अब लगभग ठप होने की कगार पर पहुंच चुका है।
🚚 थम गए ट्रकों के पहिए: 3 दिनों से लौह अयस्क की ढुलाई बंद, बस्तर परिवहन संघ के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट
डीजल की भारी किल्लत की वजह से पिछले 3 दिनों से बस्तर संभाग में लौह अयस्कों (आयरन ओर) की ढुलाई पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। इसके चलते बैलाडिला ट्रक यूनियन और बस्तर परिवहन संघ (BPS) के सैकड़ों से अधिक ट्रकों के पहिये पूरी तरह थमने की कगार पर पहुंच चुके हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि रायपुर ट्रक यूनियन की भी सैकड़ों ट्रकें सिर्फ ईंधन न मिलने की वजह से बस्तर के अलग-अलग ट्रांसपोर्ट नगरों और पेट्रोल पंपों के बाहर खड़ी हैं। ट्रकों पर काम करने वाले ड्राइवरों, क्लीनरों और स्थानीय मजदूरों पर भी अब रोजी-रोटी का गंभीर आर्थिक संकट गहराने लगा है।
💬 परिवार पालना हुआ मुश्किल: बस्तर परिवहन संघ के अध्यक्ष प्रदीप पाठक ने जताई गहरी चिंता, माल समय पर न पहुंचने से नुकसान
बस्तर परिवहन संघ के अध्यक्ष प्रदीप पाठक का इस गंभीर स्थिति पर कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों तक यही हाल रहा, तो परिवहन क्षेत्र से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हजारों ट्रांसपोर्टरों और मजदूरों को अपना परिवार पालना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि खदानों से लौह अयस्क तो काफी आसानी से मिल जा रहा है, लेकिन माल को तय समय पर संबंधित फैक्ट्रियों और बंदरगाहों तक पहुंचाने में बड़ी परेशानी हो रही है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगाने के बाद भी एक समय पर गाड़ियों को भरपूर डीजल नहीं मिल पा रहा है, जिससे पूरा सिस्टम चरमरा गया है।
🏢 नवरत्न कंपनी NMDC की खदानों पर असर: रायपुर और विशाखापट्टनम की सप्लाई चेन टूटी, सड़कों पर लगी वाहनों की लंबी कतारें
आपको बता दें कि देश की नवरत्न कंपनियों में से एक एनएमडीसी (NMDC) की दंतेवाड़ा के किरंदुल और बैलाडिला में स्थित लौह अयस्क खदानें देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खदानों में गिनी जाती हैं। यहां से हर रोज लाखों टन लौह अयस्क का परिवहन सैकड़ों ट्रकों के माध्यम से रायपुर, भिलाई और विशाखापट्टनम जैसे बड़े औद्योगिक शहरों तक किया जाता है। पिछले 3 दिनों से डीजल की किल्लत ने इस पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। ट्रांसपोर्ट नगरों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर ट्रकों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी हुई हैं।
⛽ सीमेंट लेकर पहुंचे ट्रक बस्तर में फंसे: वापसी के लिए पेट्रोल पंपों में भटक रहे चालक, 4 दिनों से ठप है परिचालन
इस पूरे ईंधन संकट में सबसे बुरा हाल रायपुर ट्रक यूनियन से जुड़ी गाड़ियों का है। ये ट्रकें रायपुर से सीमेंट लेकर तो बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में सुरक्षित पहुंची हैं, लेकिन वापस लौटते समय उन्हें खदानों से लौह अयस्क ले जाने के लिए स्थानीय पेट्रोल पंपों में पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से पिछले तीन से चार दिनों से ड्राइवरों ने अपनी ट्रकें सड़क किनारे खड़ी कर दी हैं। ट्रांसपोर्टरों ने प्रशासन से मांग की है कि औद्योगिक और मालवाहक वाहनों के लिए डीजल की सुचारू उपलब्धता तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि बस्तर के सबसे बड़े व्यवसाय को पूरी तरह डूबने से बचाया जा सके।


छत्तीसगढ़




























