नई दिल्ली: दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में जज और वकीलों के बीच हुई तीखी बहस का गंभीर मुद्दा अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद में तब्दील हो गया है। कोर्ट रूम के अंदर दोनों पक्षों के बीच हुई इस गहमागहमी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने त्वरित एक्शन लेते हुए विवादों में घिरे जिला जज राकेश कुमार का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को एक अहम प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए रोहिणी कोर्ट के जिला जज राकेश कुमार को दिल्ली ज्यूडिशियल अकादमी से अटैच कर दिया है। यह बड़ा फैसला उस वीडियो के सार्वजनिक होने के ठीक दो दिन बाद लिया गया है, जिसमें अदालत की लाइव कार्यवाही के भीतर जज और एक वकील के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही थी।
📹 15 मई को स्थगन की मांग पर भड़का था विवाद: बहस के दौरान वकील ने शुरू की रिकॉर्डिंग, कोर्ट स्टाफ ने जज को चैंबर में भेजा
अदालती सूत्रों के अनुसार, यह पूरी घटना 15 मई को एक मामले की नियमित सुनवाई के दौरान घटित हुई थी। सुनवाई के समय बचाव पक्ष के वकील ने संबंधित मामले में कोर्ट से स्थगन (Adjournment) देने की मांग की थी, जिसके बाद जज और वकील के बीच अचानक तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। यह बहस देखते ही देखते इस कदर बढ़ गई कि कोर्ट रूम के भीतर हाथापाई तक की नौबत आ गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में जज अपने डायस (मंच) पर खड़े होकर वकील से बेहद ऊंची आवाज में बात करते दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद स्थिति बिगड़ती देख कोर्ट स्टाफ उन्हें उनके सुरक्षित चैंबर तक ले जाता नजर आता है। वकील ने आरोप लगाया था कि जज ने उनके साथ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया, जिसके विरोध में उन्होंने पूरी घटना की लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी थी।
⚖️ रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज ने जारी किया आदेश: धीरज मित्तल संभालेंगे कमान, सुरक्षित फैसलों के लिए मिला 3 हफ्ते का समय
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज ने रविवार (17 मई) की शाम को आधिकारिक आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत जिला जज राकेश कुमार-V को अब दिल्ली ज्यूडिशियल अकादमी के निदेशक के साथ अटैच किया गया है। वहीं, उनकी जगह पर वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी धीरज मित्तल को अकादमी से ट्रांसफर कर रोहिणी कोर्ट में जिला जज-4 के पद पर तैनात किया गया है। हाईकोर्ट के इस विशेष आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित न्यायिक अधिकारी अपनी नई पोस्टिंग पर जाने से पहले अपने सभी लंबित मामलों और सुरक्षित रखे गए फैसलों की विस्तृत जानकारी देंगे। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सुरक्षित रखे गए निर्णयों का निपटारा अधिकतम दो से तीन हफ्ते के अंदर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
🏛️ ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने जताई कड़ी आपत्ति: कोर्ट रूम में वीडियो रिकॉर्डिंग को बताया गैर-कानूनी और दबाव की रणनीति
दूसरी तरफ, दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने इस पूरे घटनाक्रम में कोर्ट रूम के भीतर की जा रही अदालती कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग को पूरी तरह से गैर-कानूनी बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अदालत के भीतर वीडियो रिकॉर्ड कर उसे जानबूझकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करना न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने और न्यायिक अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाने की एक सोची-समझी कोशिश है। एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट से पुरजोर मांग की है कि इस विवादित वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाने के निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही, उन्होंने जिला जज के ईमानदार और स्वतंत्र आचरण के समर्थन में अपनी पूरी एकजुटता भी प्रदर्शित की।
🛑 जिला अदालतों के वकीलों का न्यायिक कार्य से दूर रहने का ऐलान: समन्वय समिति की हड़ताल को न्यायिक संघ ने बताया अवैध
इस प्रशासनिक फेरबदल के बावजूद दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों के वकीलों ने जज के खिलाफ अपना मोर्चा पूरी तरह खोल रखा है। दिल्ली की सभी जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति (Coordination Committee) ने इस घटना के विरोध में सोमवार को पूरी तरह से न्यायिक कार्य से दूर रहने (हड़ताल) का सामूहिक फैसला लिया है। हालांकि, ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ने वकीलों के इस हड़ताल के फैसले का कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के स्थापित दिशा-निर्देशों और पुराने फैसलों के अनुसार, अदालतों में वकीलों द्वारा की जाने वाली ऐसी हड़तालें पूरी तरह से अवैध और न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने वाली मानी जाती हैं। फिलहाल रोहिणी कोर्ट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
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