रायपुर : छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने मानवाधिकार आयोग में आए मामलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। गिरधारी नायक ने बताया कि साल 2001 से 2026 तक आयोग के सामने करीब 74 हजार मामले पहुंचे, जिनमें लगभग 900 प्रकरण अभी लंबित हैं। आयोग के मुताबिक कुल मामलों में 40 से 45 प्रतिशत प्रकरण सीधे तौर पर सामाजिक बहिष्कार से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा सड़क हादसों को प्रभावी रूप से रोकने के लिए बार-बार दुर्घटना करने वाले ड्राइवरों के लाइसेंस की समीक्षा और सुरक्षित ड्राइविंग करने वाले चालकों को सम्मानित करने का सुझाव भी दिया गया है।
⚖️ 40 से 45 फीसदी मामले सामाजिक बहिष्कार से संबंधित
आयोग के अनुसार उसके सामने आने वाले कुल मामलों में करीब 40 से 45 प्रतिशत प्रकरण सामाजिक बहिष्कार से संबंधित हैं। हालांकि इनमें से करीब एक प्रतिशत मामलों में ही कानूनी कार्रवाई की स्थिति बनती है। परिस्थितियों के अनुसार ऐसे मामलों में समझाइश, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई या अपराध दर्ज करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाती है।
🚦 बार-बार एक्सीडेंट करने वाले ड्राइवरों के लाइसेंस की होगी समीक्षा
सड़क हादसों को रोकने के लिए मानव अधिकार आयोग ने आरटीओ और ट्रैफिक विभाग के साथ विशेष चर्चा की है। आयोग ने सुझाव दिया है कि तीन से अधिक दुर्घटनाएं करने वाले ड्राइवरों के लाइसेंस की गंभीरता से समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर उनके लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की जाए। वहीं, लंबे समय तक सुरक्षित तरीके से बिना दुर्घटना के वाहन चलाने वाले ड्राइवरों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने का भी सुझाव दिया गया है। आयोग का मानना है कि सुरक्षित ड्राइविंग करने वालों को प्रोत्साहन देने से सड़क सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा मिल सकता है।
🚚 ट्रक ड्राइवरों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस की बड़ी पहल
ट्रक ड्राइवरों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी आयोग ने एक अहम पहल की है। गिरधारी नायक के मुताबिक प्रदेश में 10 से अधिक ट्रक रखने वाले करीब 3 हजार ट्रक मालिक हैं। उनसे जुड़े लगभग 30 हजार ट्रक ड्राइवरों को ग्रुप इंश्योरेंस का लाभ दिलाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आधिकारिक पत्र लिखा गया है। आयोग ने ट्रक ड्राइवरों को राज्य की अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनकी समस्याओं को मानवाधिकारों से जुड़ा एक गंभीर विषय माना है।
🧹 रायपुर के 6 हजार सफाई कर्मचारियों में से 1800 से जुड़ी समस्याएं आईं सामने
राजधानी रायपुर में करीब 6 हजार सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 1800 कर्मचारियों से जुड़ी किसी न किसी प्रकार की समस्या की जानकारी सामने आई है। इन सभी समस्याओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर नगर निगम और जिला प्रशासन को सौंप दी गई है, ताकि संबंधित विभाग समय पर उनका उचित निराकरण कर सकें। आयोग ने सफाई कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ कार्य के दौरान जरूरी सुविधाओं को पूरी तरह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है।
🦠 दोबारा की गई जांच में मिले 1500 नए कुष्ठ रोगी
आयोग के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों और ग्रामीण इलाकों में पहले 3 हजार से अधिक कुष्ठ रोगी चिन्हित थे। आयोग ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से ऐसे लोगों की दोबारा स्वास्थ्य जांच कराने का अनुरोध किया था, जिनके घर या आसपास कुष्ठ रोग से पीड़ित मरीज पहले से पाए गए थे। दोबारा की गई इस जांच में करीब 1500 नए मरीज सामने आए। आयोग के अनुसार इन सभी का डॉक्टरों की विशेष निगरानी में नियमित इलाज चल रहा है। आयोग का मुख्य उद्देश्य बीमारी की समय पर पहचान कर मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।
🏫 जर्जर स्कूल भवनों के डिजाइन में बदलाव का दिया गया अनूठा सुझाव
विभिन्न जिलों के स्कूलों के निरीक्षण के दौरान आयोग को कुछ स्कूल भवनों की स्थिति काफी जर्जर मिली। संबंधित अधिकारियों को ऐसे भवनों की जल्द से जल्द मरम्मत कराने के उपयोगी सुझाव दिए गए। आयोग के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में बने कुछ स्कूल भवनों की छत पर बारिश का पानी जमा हो जाता है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से छत खराब होने लगती है और कुछ वर्षों बाद पानी टपकने या प्लास्टर गिरने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आती हैं। इसे देखते हुए आयोग ने स्कूलों की छत को ढलान वाला बनाने और भवनों के डिजाइन में जरूरी बदलाव करने का सुझाव दिया है, ताकि बारिश का पानी तुरंत निकल सके और भवन लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
💰 छात्रों की कॉशन मनी और डेली वेज कर्मचारियों के वेतन से जुड़े प्रकरण
कॉलेज के विद्यार्थियों की कॉशन मनी वापस नहीं मिलने की कई शिकायतें भी आयोग के सामने आईं। शिकायत मिलने के बाद संबंधित महाविद्यालयों को नोटिस भेजे गए, जिसके बाद कई मामलों का त्वरित निराकरण हुआ। इसी प्रकार डेली वेज (दैनिक वेतनभोगी) कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने की शिकायतों पर भी आयोग ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामले रखे, जिसके बाद वेतन से जुड़े कई लंबित प्रकरणों का भी सफल निराकरण किया गया।
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