छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी बहुल इलाके चावलपानी से होकर गुजरने वाली दूधी नदी पर सरकार द्वारा बांध बनाकर पानी की व्यवस्था करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, स्थानीय आदिवासी किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन को सरकार अधिग्रहण करने की तैयारी कर रही है, वह उनके लिए सिर्फ जमीन नहीं बल्कि उनकी मां और रोजी-रोटी का एकमात्र साधन है। आदिवासियों का साफ कहना है कि यदि यह जमीन उनसे छिनी गई, तो उनके सामने भीषण आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। इसी का विरोध करते हुए ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
📢 11 गांवों के आदिवासियों को मिला विस्थापन का नोटिस
राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा की राष्ट्रीय संयोजक देवरा बिन भलावी ने बताया कि चावलपानी की दूधी नदी पर बनने वाले इस बांध की वजह से लगभग 107 आदिवासी बहुल गांव प्रभावित होंगे। इनमें से शुरुआती तौर पर 11 गांवों के लोगों को जमीन अधिग्रहण के नोटिस जारी किए गए हैं। सरकार द्वारा जमीन छीने जाने की सुगबुगाहट के बाद से ही ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। आदिवासियों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि वे किसी भी कीमत पर बांध निर्माण के लिए अपनी उपजाऊ जमीन नहीं देंगे और इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह रोकने की मांग कर रहे हैं।
⚖️ पेसा एक्ट के नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप
ग्रामीणों और युवा प्रतिनिधियों का आरोप है कि सरकार आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने वाले ‘पेसा एक्ट’ (PESA Act) के नियमों का पालन नहीं कर रही है। नियमानुसार किसी भी आदिवासी क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण या निर्माण कार्य से पहले ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराना अनिवार्य होता है, लेकिन जिन 11 गांवों में नोटिस दिए गए हैं, वहां किसी भी प्रकार की ग्राम पंचायत सहमति या प्रस्ताव नहीं लिया गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों और नियमों की अनदेखी बंद नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
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