धनबाद। इस बार दुर्गापूजा के पावन अवसर पर धनबाद के हीरापुर स्थित झारखंड मैदान में आस्था, कला और पर्यावरण संरक्षण का बेहद अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यहां करीब 32 लाख रुपये की लागत से ‘शीश महल’ की थीम पर एक भव्य और आकर्षक पूजा पंडाल तैयार किया गया है। इस पंडाल की सबसे बड़ी और खास विशेषता अंडमान-निकोबार की आदिवासी परंपरा और संस्कृति को कलात्मक रूप से दर्शाना है, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
🌱 प्लास्टिक मुक्त और पूरी तरह इको-फ्रेंडली: बांस, जूट और प्राकृतिक पत्तों से की गई है अद्भुत सजावट
आधुनिक चकाचौंध और कृत्रिम सजावट के दौर में झारखंड मैदान का यह पंडाल पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) स्वरूप में तैयार किया गया है। इसे बनाने में बांस, बांस की चटाई, होगला पत्ता, जूट, नारियल के छिलके और विभिन्न प्राकृतिक पत्तों जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है। कुशल कारीगरों ने अपने हाथों से इन प्राकृतिक संसाधनों को तराश कर बेहद बारीक और आकर्षक कलाकृतियां गढ़ी हैं। आयोजकों का मुख्य उद्देश्य केवल भव्यता प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि जन-जन तक पर्यावरण संरक्षण का सकारात्मक संदेश पहुंचाना है।
🌍 धार्मिक उत्सव के साथ संस्कृति और प्रकृति का संदेश: अंडमान-निकोबार की झलक ला रही है नया रोमांच
इस पंडाल के माध्यम से श्रद्धालुओं को अंडमान-निकोबार की जनजातीय जीवनशैली और उनकी समृद्ध विरासत को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। यह पहल यह साबित करती है कि आस्था और उल्लास के पर्वों को प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना भी अत्यंत भव्य और यादगार बनाया जा सकता है। प्राकृतिक सामग्रियों से सजे इस भव्य पंडाल को देखने के लिए धनबाद समेत आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
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