झारखंड में पढ़ाई बीच में छोड़ चुके और स्कूल से बाहर (आउट ऑफ स्कूल) रह गए 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में लाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के माध्यम से शिशु पंजी का अद्यतन किया जाएगा। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSE) को इस संबंध में डहर पोर्टल पर मैपिंग और शिक्षकों की टैगिंग सुनिश्चित करने के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
📱 डहर पोर्टल पर होगी गांवों और टोलों की मैपिंग, 10 नवंबर 2026 से संभावित रूप से शुरू होगा सर्वे
जारी निर्देशों के अनुसार, बीईईओ और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों की देखरेख में स्कूलों को उनके नजदीकी गांवों और टोलों से जोड़ा जाएगा। प्रधानाध्यापक डहर पोर्टल (Dahar Portal) पर अपने स्कूल क्षेत्र के कुल परिवारों और टोलों का ब्योरा दर्ज करेंगे। इसके बाद शिक्षकों व सहायक अध्यापकों को संबंधित घरों का आवंटन कर टैग किया जाएगा। किसी भी घर का दोबारा सर्वे न हो और कोई परिवार छूटे नहीं, इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षकों की टैगिंग रिपोर्ट 7 नवंबर 2026 तक फ्रीज कर दी जाएगी, जिसके बाद 10 नवंबर 2026 से घर-घर जाकर शिशु पंजी अद्यतन का काम शुरू होगा।
📊 पिछले सत्र में 29,995 बच्चे पाए गए थे स्कूल से बाहर, अब नए सिरे से जुटाए जाएंगे आंकड़े
राज्यस्तरीय शिशु पंजी रिपोर्ट 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 24 जिलों के 54.44 लाख से अधिक परिवारों के बीच चलाए गए सर्वे में 29,995 बच्चे स्कूल से बाहर चिह्नित किए गए थे। इनमें 16,375 लड़के, 13,615 लड़कियां और 5 ट्रांसजेंडर बच्चे शामिल थे। आयु वर्ग के हिसाब से 3 से 5 वर्ष के 10,133 बच्चे, 6 से 14 वर्ष के 11,638 बच्चे और 15 से 18 वर्ष के 8,224 बच्चे शिक्षा से वंचित पाए गए थे। नए वित्तीय वर्ष में होने वाले इस व्यापक सर्वे से ताजा आंकड़े सामने आएंगे, जिसके आधार पर इन बच्चों का स्कूलों में पुनः दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा।
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