भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित प्रतिष्ठित पुलिस अकादमी भौंरी में नवनियुक्त उप पुलिस अधीक्षकों (DSP) के प्रशिक्षण का समापन एक भव्य दीक्षांत समारोह के साथ हुआ। इस दीक्षांत समारोह के दौरान आयोजित पासिंग आउट परेड में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। मुख्यमंत्री ने शानदार परेड की सलामी ली और निरीक्षण कर युवा अधिकारियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 48 नए डीएसपी अधिकारियों को निष्ठा, सेवा और जनसुरक्षा का कड़ा मंत्र देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराधियों और माफियाओं से किसी भी प्रकार से डरने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ पूरी सख्ती के साथ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की पुलिस पूरी तरह सक्षम है और अपने सेवा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी पूरी ताकत और प्रामाणिकता से कार्य करेगी।
‘सोशल मीडिया की रीलों से नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान से बने पुलिस की वास्तविक पहचान’— मुख्यमंत्री
नवनियुक्त पुलिस अधिकारियों को मार्गदर्शन देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि एक खाकीधारी अधिकारी की जिम्मेदारी केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखने तक ही सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद तबके को सुरक्षा का पूरा अहसास कराना भी उनका मुख्य दायित्व है। उन्होंने युवाओं को नसीहत देते हुए कहा कि महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों के लिए पुलिस अधिकारी हमेशा एक मददगार और संबल की भूमिका निभाएं। आज के दौर में पुलिस की पहचान सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो या रीलों से नहीं बननी चाहिए, बल्कि जनता की वास्तविक और जमीनी समस्याओं के त्वरित समाधान से उनकी प्रतिष्ठा स्थापित होनी चाहिए। वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने से कहीं अधिक जरूरी है कि अधिकारी अपनी सूझबूझ, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और समस्याओं का मौके पर हल निकालने के कौशल को विकसित करें। मैदानी स्तर पर फील्ड में कार्य करते समय विवेक, धैर्य और संयम को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।
चंबल से लेकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पुलिस की कार्यप्रणाली सराहनीय, हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है बल
कानून व्यवस्था के इतिहास का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब प्रदेश के चंबल, ग्वालियर और विंध्य अंचल डकैतों और अपराधियों के आतंक के लिए जाने जाते थे, लेकिन हमारे पुलिस बल ने तमाम विपरीत परिस्थितियों का डटकर सामना किया और इन क्षेत्रों में शांति व कानून का पुख्ता राज स्थापित किया। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश को नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त कराने की दिशा में भी राज्य के पुलिस बल की भूमिका अत्यंत सराहनीय और ऐतिहासिक रही है।
खातेगांव टीआई दिलीप पुरी की शहादत पर सीएम ने जताया गहरा शोक, कहा— पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है सरकार
समारोह के दौरान खातेगांव के दिवंगत थाना प्रभारी (TI) दिलीप पुरी की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार इस कठिन समय में शहीद पुलिसकर्मी के परिवार की हर संभव मदद और उनकी हर जरूरत को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। परिवार को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। जहरीली शराब के अवैध कारोबार और इस प्रकार की अन्य आपराधिक गतिविधियों को राज्य सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। हमारे एक वीर जवान ने अपने कर्तव्य पथ पर प्राणों की आहुति दी है, और ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति भविष्य में न हो, इसके लिए शासन स्तर पर बेहद कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
अपराधियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी, सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हत्याकांड के आरोपी पर हुई त्वरित कार्रवाई का किया जिक्र
मीडिया से अनौपचारिक चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में आरोपी के खिलाफ हुई त्वरित पुलिस कार्रवाई पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक कहा कि इस जघन्य घटना के आरोपी के खिलाफ कानून सम्मत सख्त कार्रवाई की गई है। सरकार का यह निरंतर प्रयास रहता है कि राज्य में इस तरह के अपराध सिर न उठाएं, किंतु यदि कोई भी व्यक्ति कानून को हाथ में लेता है, तो अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
डीजीपी कैलाश मकवाना ने दी अधिकारियों को सलाह, कहा— कर्तव्य निर्वहन के साथ-साथ अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा का भी रखें पूरा ध्यान
इस महत्वपूर्ण दीक्षांत समारोह के दौरान प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने खातेगांव थाना प्रभारी दिवंगत दिलीप पुरी की असामयिक मौत का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डीजीपी ने कहा कि अधिकारी का अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करना जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि वे फील्ड में अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखें। उन्होंने सभी नए अधिकारियों को सलाह दी कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सुरक्षा और आत्मरक्षा से जुड़ी जितनी भी तकनीकी सीख दी गई है, वे मैदानी परिस्थितियों में उनका पूरी तरह पालन करें।
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