खंडवा। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव की तिथि को लेकर इस वर्ष भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सरकारी कैलेंडर में 31 मार्च को महावीर जयंती घोषित कर अवकाश दिया गया है, जबकि जैन परंपराओं, जैन पंचांग और जैन कैलेंडरों के अनुसार यह महोत्सव सोमवार, 30 मार्च को ही मनाया जाएगा।
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जिज्ञासा समाधान के दौरान परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज ने स्पष्ट किया कि भगवान महावीर का जन्म चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को हुआ था।
उदयातिथि के आधार पर 30 मार्च शास्त्रसम्मत…
इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 30 मार्च को प्रातः 7 बजे से प्रारंभ होकर 31 मार्च को प्रातः लगभग 7 बजे तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। ज्योतिष शास्त्र में ‘उदयातिथि’ मान्य होती है, अर्थात सूर्योदय के समय जो तिथि विद्यमान रहती है, वही पूरे दिन प्रभावी मानी जाती है।
31 मार्च की स्थिति: सूर्योदय के समय त्रयोदशी तो रहेगी, लेकिन वह केवल सुबह 7 बजे तक ही है। महावीर जन्म कल्याणक के प्रमुख आयोजन प्रातः 7 बजे के बाद ही होते हैं।
30 मार्च की स्थिति: सूर्योदय के बाद प्रातः 7 बजे से त्रयोदशी प्रारंभ होकर पूरे दिन रहेगी। इस आधार पर 30 मार्च को ही महावीर जयंती मनाना शास्त्रसम्मत होगा।
अहिंसा के पुजारी भगवान महावीर स्वामी का जन्म जयंती उत्सव पूरे देश में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। मुनि प्रमाणसागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि तिथि भ्रम के कारण समाज में संशय की स्थिति बनी है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि 31 मार्च को त्रयोदशी केवल अल्प समय के लिए है, जबकि 30 मार्च को प्रातः 7 बजे से पूरे दिन त्रयोदशी विद्यमान रहेगी। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि जैन परंपराओं और ज्योतिष के अनुसार एकजुट होकर संपूर्ण विश्व में 30 मार्च को ही महोत्सव मनाया जाए।प्रमुख संत प्रमाणसागर जी ने भी किया समर्थन…
समाज में एकरूपता बनाए रखने की अपील…
संतों के मार्गदर्शन के बाद अब जैन समाज से अपील की जा रही है कि किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति में न पड़ें। परंपरा और शास्त्रानुसार 30 मार्च को ही भगवान महावीर जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाए, ताकि पूरे विश्व में एकरूपता बनी रहे और महोत्सव की गरिमा बनी रहे।



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