Patna Fraud News: तकनीक के जमाने में साइबर अपराध से बचाव के लिए बैंक अपने ग्राहकों को कई तरह की जानकारी देता है. बैंक ये भी बताता है कि किस तरीके से ग्राहक सावधान होकर ठगी से बच सकते हैं. लेकिन बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराधियों ने बड़ी घटना को अंजाम दिया है. दरअसल, अपराधियों ने SBI के रिटायर्ड मुख्य महाप्रबंधक को ही अपना शिकार बना लिया है. ठगी की यह कहानी फेसबुक पर दिए गए विज्ञापन से हुई. उसके बाद से ब्लैकमेल तक जा पहुंची. अब साइबर थाने की पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.
इस बारे में जानकारी देते हुए साइबर थाने के डीएसपी सह एसएचओ नीतिश चंद्र धारिया ने बताया कि पुलिस को एक आवेदन प्राप्त हुआ था. जिसमें इन्वेस्टमेंट के नाम पर आवेदक से 97 लाख रुपए ठग लिए गए थे।.
उन्होंने जानकारी दी कि फेसबुक पर एक विज्ञापन दिया गया था. जहां पर अमरेंद्र सिन्हा नाम के व्यक्ति ने संपर्क किया. उस विज्ञापन पर दिए गए लिंक पर संपर्क करने के बाद उनकी साक्षी अग्रवाल नाम की एक महिला से बातचीत शुरू हुई. हालांकि, ये भी अभी जांच का विषय है कि साक्षी अग्रवाल सही नाम है या गलत नाम? बातचीत में साक्षी अग्रवाल ने अमरेंद्र सिन्हा को यह बताया कि उनके पास इन्वेस्टमेंट करने का करीब चार साल का अनुभव है.
साक्षी अग्रवाल ने खुद को विवि कंस्ट्रक्शन, मुंबई से जुड़ा हुआ बताया
साक्षी अग्रवाल ने इन्वेस्टमेंट करने के लिए अपने आप को अनुभवी बताया. इसके बाद पीड़ित का भरोसा जीत कर लगभग 97 लाख रुपए इन्वेस्टमेंट करने के नाम पर ठग लिए गए. जानकारी के अनुसार अमरेंद्र सिन्हा अगस्त 2024 में एसबीआई से रिटायर हुए थे. साइबर डीएसपी ने बताया कि पीड़ित ने एक दो नहीं बल्कि कई अकाउंट में पेमेंट किया है. उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि जब किसी अधिकृत जगह पर इन्वेस्टमेंट करते हैं तो उसका एक रजिस्टर्ड अकाउंट नंबर भी होता है. अलग-अलग अकाउंट में जब पैसे मांगे गए तो इससे संदेह उत्पन्न होता है.
मिली खबर के अनुसार, साक्षी ने पीड़ित को पॉलियस फाइनेंस पिक, नामक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश की सलाह दी थी. शुरू में उनसे 43 हजार रुपए निवेश करने पर लगभग दो हजार रुपए का मुनाफा दिया गया. इस मुनाफे ने अमरेंद्र का भरोसा जीत लिया और वो लगातार बड़ी रकम निवेश करने लगे.
ऐसे चलता गया ठगी का सारा खेल
बताया जा रहा है कि मामले में पोल तब खुली जब अमरेंद्र ने अपने पैसे निकालने की कोशिश की. अक्टूबर 2025 तक अमरेंद्र के डिजिटल वॉलेट में एसेट की वैल्यू लगभग साढ़े तीन लाख रुपए दिखाई दे रही थी. जब अमरिंदर ने अपने पैसे निकालने की कोशिश की तो उन्हें कथित रूप से कंपनी से एक मेल भेजा गया। जिसमें यह बताया गया कि निकासी के लिए उनको 15% एक्सचेंज कमीशन देना होगा जो कि करीब 45 लाख रुपए होते हैं. शातिरों ने अमरेंद्र का विश्वास जीतने के लिए अपने पास से 15 लाख रुपए निवेश करने का नाटक किया. इसके बाद अमरेंद्र उनके जाल में फंस गए. अमरेंद्र से ऑडिट फीस के नाम पर भी लगभग पांच लाख रुपए लिए गए.
केवल इतना ही नहीं पीड़ित से सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर 95 लाख रुपए की मांग की गई. जब उन्होंने मना कर दिया तो साक्षी ने मदद करने झांसा दिया और पेनल्टी से बचने के लिए किस्तों में पैसे लेती रही. पीड़ित को तब ठगी का एहसास हुआ जब इसी साल जनवरी महीने में साक्षी का मोबाइल बंद हो गया. अब पुलिस इस इस बेहद संगीन मामले की जांच में जुटी है.
साइबर थाने के डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने अपील की- पुलिस हमेशा यह आगाह करती है कि सोशल मीडिया के माध्यम से दिए गए विज्ञापन पर बिना वेरिफिकेशन या बिना किसी व्यक्ति की जांच पड़ताल के इन्वेस्ट करेंगे तो ठगी के शिकार हो सकते हैं. अगर इन्वेस्टमेंट करना है तो किसी अधिकृत जगह पर करें.
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