देवघर: शारदीय दुर्गा पूजा के समापन के पावन अवसर पर बुधवार को देवघर में बंगाली परंपरा के अनुसार सिंदूर खेला का बहुत ही सुंदर आयोजन किया गया. इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर इस परंपरा को पूरे उत्साह के साथ निभाया. मां दुर्गा की विदाई के इस भावुक अवसर पर महिलाओं ने अपने सुहाग की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और समाज के बेहतर भविष्य के लिए मंगलकामनाएं कीं. इसी कड़ी में देवघर के सिमरा पंचायत में भी विजयादशमी के मौके पर सिंदूर खेला का आयोजन हुआ, जहाँ बंगाली समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और अगले वर्ष फिर से खुशियों के साथ मां के आगमन की प्रार्थना की.
✨ बंगाली संस्कृति में विशेष महत्व रखता है सिंदूर खेला, खुशी और भावुकता का दिखा अनूठा संगम
सिंदूर खेला बंगाली समुदाय की एक बेहद महत्वपूर्ण और प्राचीन धार्मिक परंपरा है, जिसे मुख्य रूप से विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की विदाई से ठीक पहले निभाया जाता है. मान्यताओं के अनुसार, इस परंपरा के माध्यम से महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं. देवघर जिले में बंगाली समुदाय की अच्छी-खासी आबादी होने के कारण यहां इस पर्व को विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. महिलाओं का मानना है कि इस परंपरा को निभाने से जीवन के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. मां दुर्गा की विदाई का यह अवसर श्रद्धा के साथ-साथ गहरी भावुकता से भी जुड़ा होता है, क्योंकि मां दुर्गा को बेटी की तरह विदा किया जाता है, जिसे महिलाएं खुशी और उत्साह के साथ संपन्न करती हैं.
🏛️ बोकारो और जमशेदपुर में भी महिलाओं ने निभाई सिंदूर खेला की रस्म, पंडालों में गूंजी ढाक की धुन
झारखंड के अन्य प्रमुख शहरों जैसे बोकारो और जमशेदपुर में भी मां दुर्गा की विदाई की पारंपरिक रस्में पूरी आस्था के साथ निभाई गईं. बोकारो में सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की और सिंदूर खेला में हिस्सा लिया, जहाँ एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य की कामना की गई. वहीं, जमशेदपुर में भी नवरात्र की महादशमी के अवसर पर शहर के तमाम पूजा पंडालों में सुहागन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद एक-दूसरे के माथे और मांग पर सिंदूर लगाकर वैवाहिक सुख व समृद्धि की प्रार्थना की. इस दौरान सभी पंडालों के परिसरों में ढाक की थाप और भक्तिमय माहौल के बीच उल्लास का नजारा देखने को मिला.
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