खंडवा। शहर के रामनगर क्षेत्र में आयोजित हो रही भव्य शिवमहापुराण कथा के अवसर पर एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. श्री बनवारी भाई उपमन्यु जी महाराज ने कथा के दौरान शिव परिवार के माध्यम से जीवन और परिवार प्रबंधन की महत्वपूर्ण शिक्षा दी।
विषम विचारों के बीच सामंजस्य है जरूरी: महाराज जी ने शिव परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि परिवार में यदि सदस्यों के विचार अलग-अलग हों, तब भी उनके साथ सामंजस्य बनाकर रहना चाहिए। यही एक सुखी परिवार का आधार है।
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वेशभूषा और मर्यादा पर विशेष संदेश: कथा के दौरान महाराज जी ने वर्तमान में बदलती वेशभूषा पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों और माताओं ने हमेशा मर्यादा और लोक-लज्जा को सर्वोपरि माना। शास्त्रों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि “एक वस्त्रा न्यूनवस्त्रा च यानारी मुक्तकेशा व्यवस्थिता” अर्थात् छोटे कपड़े और खुले बाल जैसी पाश्चात्य शैलियों को अपनाने वालों को धर्म-कर्म में उचित स्थान नहीं दिया गया है।
सनातन संस्कृति बनाम पाश्चात्य सभ्यता: पं. बनवारी भाई ने इस भ्रांति को दूर किया कि पर्दा प्रथा केवल मुगलकाल की देन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे शास्त्रों में मर्यादा के प्रमाण युगों पुराने हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हमें पाश्चात्य संस्कृति की नकल करने के बजाय अपनी समृद्ध सनातन संस्कृति का पालन करना चाहिए।

कथा के दौरान मनमोहक भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में डूबकर जमकर झूमे। आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी जनता से कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ लेने की अपील की है।



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